नात लिरिक्स

Hum Kabhi Na Bhulayenge

हम कभी न भुलाएँगे

नात ख़्वान: सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनीशायर: मुहम्मद आसिम-उल-क़ादरी मुरादाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ऐ मुस्तफ़ा के नवासो !'अली के दिलदारो !तुम्हें ख़ुदा के ये बंदे सलाम कहते हैं

है याद वो मंज़र कर्बल काबहता हुआ ख़ून वो असग़र कावो ज़ख़्मी बदन, जलते ख़ैमेनज़रों से न हरगिज़ जाएँगे

हम कभी न भुलाएँगेहम कभी न भुलाएँगे

ज़हरा के महकते गुलशन काहर फूल मसल डाला तू नेप्यासे होंटों को ज़ख़्मी कियाज़ालिम ! क्या कर डाला तू नेये ज़ुल्म, ये आल-ए-नबी पे सितमसारी दुनिया को बताएँगे

हम कभी न भुलाएँगेहम कभी न भुलाएँगे

वो लुटती जवानी क़ासिम की'अब्बास के वो कटते बाज़ूवो 'औन-ओ-मुहम्मद की लाशेंवो बहता हुआ कर्बल में लहूमहशर के दिन ये ज़ुल्म-ओ-सितमज़ालिम पे क़हर बन जाएँगे

हम कभी न भुलाएँगेहम कभी न भुलाएँगे

ये ज़िक्र, ये गीत शहादत केये नग़्मे उन की शुजा'अत केये घर घर में उन की बातेंलब पर ना'रे और नम आँखें'आशूरा का दिन और सूख़ी ज़बाँकर्बल की याद दिलाएँगे

हम कभी न भुलाएँगेहम कभी न भुलाएँगे

ऐ कूफ़ियो ! ये क्या तुम ने कियाआल-ए-अहमद को धोका दियापहले दा'वत दी आने कीआए तो तन्हा छोड़ दियाख़ुद को हक़ पर कहने वालेमुँह क्या हैदर को दिखाएँगे

हम कभी न भुलाएँगेहम कभी न भुलाएँगे

अल्लाह की इक शमशीर हैं येहाँ हाँ देखो शब्बीर हैं येइब्न-ए-हैदर, ज़हरा के पिसरनाना हैं इन के ख़ैर-ए-बशर'आसिम ! हैं ये जन्नत के मालिकये ही जन्नत दिलवाएँगे

हम कभी न भुलाएँगेहम कभी न भुलाएँगे

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