नात लिरिक्स

Zaair-e-Tayba Rauze Pe Ja Kar, Tu Salam Un Se Ro Ro Ke Kehan | Tu Salam Mera Ro Ro Ke Kehna

ज़ाइर-ए-तयबा रौज़े पे जा कर, तू सलाम उन से रो रो के कहना | तू सलाम मेरा रो रो के कहना

नात ख़्वान: हाजी मुश्ताक़ अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ज़ाइर-ए-तयबा ! रौज़े पे जा करतू सलाम उन से रो रो के कहनामेरे ग़म का फ़साना सुना करतू सलाम उन से रो रो के कहना

तेरी क़िस्मत पे रश्क आ रहा हैतू मदीने को अब जा रहा हैआह ! जाता है मुझ को रुला करतू सलाम उन से रो रो के कहना

जब पहुँच जाए तेरा सफ़ीनाजब नज़र आए मीठा मदीनाबा-अदब अपने सर को झुका करतू सलाम उन से रो रो के कहना

जब कि आए नज़र प्यारा मक्काचूम लेना नज़र से तू का'बाहो सके गर तो हर-जा पे जा करतू सलाम उन से रो रो के कहना

तू 'अरब की हसीं वादियों कोरेग-ज़ारों को, आबादियों कोमेरी जानिब से पलकें बिछा करतू सलाम उन से रो रो के कहना

जब कि पेश-ए-नज़र जालियाँ होंतेरी आँखों से आँसू रवाँ होंमेरे ग़म की कहानी सुना करतू सलाम उन से रो रो के कहना

आमिना के दुलारे को पहलेबा'द शैख़ैन को भी तू कह लेफिर बक़ी'-ए-मुबारक पे जा करतू सलाम उन से रो रो के कहना

माँगना मत तू दुनिया की दौलतमाँगना उन से बस उन की उल्फ़तख़ूब दीवाने दिल को लगा करतू सलाम उन से रो रो के कहना

मेरे आक़ा के मेहराब-ओ-मिंबरउन की मस्जिद के दीवार और दरक़ल्ब की आँख उन पर जमा करतू सलाम उन से रो रो के कहना

प्यारी प्यारी वो जन्नत की क्यारीचूम लेना निगाहों से सारीबहर-ए-रहमत में ग़ोता लगा करतू सलाम उन से रो रो के कहना

सब्ज़-गुंबद के दिलकश नज़ारेरूह परवर वहॉं के मनारेउन के जल्वों में ख़ुद को गुमा करतू सलाम उन से रो रो के कहना

वो शहीदों के सरदार हम्ज़ाऔर जितने वहाँ हैं सहाबातू सभी की मज़ारों पे जा करतू सलाम उन से रो रो के कहना

वो मदीने के मदनी नज़ारेदिलकश-ओ-दिल-कुशा प्यारे प्यारेउन नज़ारों पे क़ुर्बान जा करतू सलाम उन से रो रो के कहना

तू ग़ुलामों पे कहना करम करया नबी ! दूर रंज-ओ-अलम करउन को अपनी मोहब्बत 'अता करतू सलाम उन से रो रो के कहना

कहना 'अत्तार, ए शाह-ए-'आली !है फ़क़त तुझ से तेरा सुवालीतू सुवाल इस का पूरा, शहा ! करतू सलाम उन से रो रो के कहना

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