नात लिरिक्स

Ye Waqt Ki Nida Hai Ramzan Ja Raha Hai | Alvida Mah-e-Ramzan

ये वक़्त की निदा है रमज़ान जा रहा है | अल-वदा माह-ए-रमज़ाँ

नात ख़्वान: मुहम्मद हस्सान रज़ा क़ादरीशायर: सलीमुल्लाह सफ़दरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ !अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ !

ये वक़्त की निदा है, रमज़ान जा रहा हैरब को मना लो तुम भी ये दिल की इल्तिजा है

नेकी बस इक कमाओ, लाखों में अज्र पाओअल्लाह की रहमतों का ला-फ़ानी सिलसिला है

अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ !अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ !

अब ग़फ़लतों को छोड़ो, मालिक से रिश्ता जोड़ोअगले बरस में क्या हो, कब कौन जानता है

अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ !अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ !

माह-ए-सियाम का बस इतना सा फ़लसफ़ा हैशैतान को सज़ा है, रहमान की 'अता है

अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ !अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ !

शर्मिंदगी के आँसू रहमत के अब्र लाएँबंदों का अपने रब से क्या ख़ूब राब्ता है

अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ !अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ !

ये वक़्त की निदा है, रमज़ान जा रहा हैरब को मना लो तुम भी ये दिल की इल्तिजा है

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।