नात लिरिक्स

Hifz-e-Maratib Mard-e-Qalandar Mere Ala Hazrat Hain

हिफ़्ज़-ए-मरातिब मर्द-ए-क़लंदर मेरे आला हज़रत हैं

नात ख़्वान: मुहम्मद हस्सान रज़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद शौक़ीन नवाज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हिफ़्ज़-ए-मरातिब, मर्द-ए-क़लंदर मेरे आ'ला हज़रत हैं'इश्क़-ओ-वफ़ा और 'इल्म के पैकर मेरे आ'ला हज़रत हैं

हिफ़्ज़-ए-मरातिब, मर्द-ए-क़लंदर मेरे आ'ला हज़रत हैं

जिन से अपने वक़्त के मुफ़्ती 'इल्म का सदक़ा माँगते हैं'इल्म-ओ-अदब के ऐसे समंदर मेरे आ'ला हज़रत हैं

हिफ़्ज़-ए-मरातिब, मर्द-ए-क़लंदर मेरे आ'ला हज़रत हैं

फ़तवे में और तक़्वे में, आक़ा की सना में आज कहींजिन का नहीं है कोई भी हम-सर मेरे आ'ला हज़रत हैं

हिफ़्ज़-ए-मरातिब, मर्द-ए-क़लंदर मेरे आ'ला हज़रत हैं

क़ाते'-ए-शिर्क-ओ-बिद'अत जिन को सारा ज़माना कहता हैमौला 'अली की तेग़ का तेवर मेरे आ'ला हज़रत हैं

हिफ़्ज़-ए-मरातिब, मर्द-ए-क़लंदर मेरे आ'ला हज़रत हैं

जिन के नाम से आज भी दुश्मन ख़ौफ़ से काँपने लगते हैंदीन-ए-नबी के ऐसे ख़ंजर मेरे आ'ला हज़रत हैं

हिफ़्ज़-ए-मरातिब, मर्द-ए-क़लंदर मेरे आ'ला हज़रत हैं

दीन-ए-मुहम्मद की ख़िदमत को, 'इश्क़-ए-मुहम्मद में ढल करजो हैं लगाते तख़्त को ठोकर मेरे आ'ला हज़रत हैं

हिफ़्ज़-ए-मरातिब, मर्द-ए-क़लंदर मेरे आ'ला हज़रत हैं

शौक़-ए-फ़रीदी ! राह-ए-हिदायत से मैं कैसे भटकूँगामेरे मुर्शिद मेरे रहबर मेरे आ'ला हज़रत हैं

हिफ़्ज़-ए-मरातिब, मर्द-ए-क़लंदर मेरे आ'ला हज़रत हैं

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