नात लिरिक्स

Bas Mera Mahi Salle Ala

बस मेरा माही सल्ले-अला

नात ख़्वान: मुहम्मद हस्सान रज़ा क़ादरीशायर: हुसैन आसीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बस मेरा माही सल्ले-'अला, बस मेरा माही सल्ले-'अला

मैं कुछ भी नहीं, मैं कुछ भी नहीं

बस मेरा माही सल्ले-'अला, बस मेरा माही सल्ले-'अला

रहमत-ए-'आलम बन कर आया, दोनों जहाँ पर उन का सायामालिक-ए-कुल महबूब-ए-ख़ुदा, मैं कुछ भी नहीं, मैं कुछ भी नहीं

बस मेरा माही सल्ले-'अला, बस मेरा माही सल्ले-'अला

ताहा, यासीन और मुज़म्मिल, शाह-ए-मदीना अहमद-ए-मुरसलशाफ़े'-ओ-नाफ़े'-ए-रोज़-ए-जज़ा, मैं कुछ भी नहीं, मैं कुछ भी नहीं

बस मेरा माही सल्ले-'अला, बस मेरा माही सल्ले-'अला

दोनों 'आलम सदक़ा जिन का, सुब्ह-ओ-शाम है चर्चा जिन काविर्द-ए-मलाइक सल्ले-'अला, मैं कुछ भी नहीं, मैं कुछ भी नहीं

बस मेरा माही सल्ले-'अला, बस मेरा माही सल्ले-'अला

'अर्श पे आने जाने वाले, रहमत-ए-'आलम हक़ के उजालेवो महबूब-ए-रब्ब-ए-'उला, मैं कुछ भी नहीं, मैं कुछ भी नहीं

बस मेरा माही सल्ले-'अला, बस मेरा माही सल्ले-'अला

उन के करम की बात है, 'आसी ! रब का करम और दुनिया राज़ीवो हैं मख़ज़न-ए-जूद-ओ-सख़ा, मैं कुछ भी नहीं, मैं कुछ भी नहीं

बस मेरा माही सल्ले-'अला, बस मेरा माही सल्ले-'अला

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