नात लिरिक्स

Ye Tooti Chatai Ye Mitti Ka Bartan

ये टूटी चटाई ये मिट्टी का बर्तन

नात ख़्वान: दिलबर शाहीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ये टूटी चटाई, ये मिट्टी का बर्तनहिक़ारत से नादान क्या देखता हैग़रीबी मुहम्मद के घर से चली हैमेरे घर का सामान क्या देखता है

ये शान-ए-पयम्बर कि मिम्बर के ऊपरसहाबा की मौजूदगी में चढ़ा करये फ़रमा रहे हैं नबी मुस्कुरा करसुना ना'त, हस्सान ! क्या देखता है

गुनहगार होते हुए भी सँभल करमलक से ये कहती है उम्मत मचल करमेरे सामने शाफ़े'-ए-हश्र हैं जबतो फिर मेरा मीज़ान क्या देखता है

ये कह दो अबू-जहल, 'उत्बा, लहब सेहो हिम्मत तो आ कर निपट ले 'उमर सेखुले-'आम आज़ान होंगी नमाज़ें'उमर का ये ए'लान क्या देखता है

ज़माने की नज़रों से ख़ुद को बचा करये कहता है पागल की सूरत बना करकभी सर झुका कर, कभी सर उठा करख़ुदा जाने मस्तान क्या देखता है

तुझे कुछ पता है ये क्या हो रहा हैमिटाने का तुझ को मिशन चल रहा हैलिहाज़ा कफ़न का 'अमामा बना करनिकल अब, मुसलमान ! क्या देखता है

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