नात लिरिक्स

Ye Arz Gunahgar Ki Hai Shah-e-Zamana

ये अर्ज़ गुनहगार की है शाह-ए-ज़माना

नात ख़्वान: महमूद अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ये 'अर्ज़ गुनहगार की है शाह-ए-ज़मानाजब आख़िरी वक़्त आए मुझे भूल न जाना

सकरात की जब सख़्तियाँ सरकार हों तारीलिल्लाह ! मुझे अपने नज़ारों में गुमाना

डर लगता है ईमाँ कहीं हो जाए न बर्बादसरकार ! बुरे ख़ातमे से मुझ को बचाना

जब रूह मेरी तन से निकलने की घड़ी होशैतान-ए-लईं से मेरा ईमान बचाना

जब दम हो लबों पर, ऐ शहंशाह-ए-मदीना !तुम जल्वा दिखाना मुझे कलमा भी पढ़ाना

आक़ा ! मेरा जिस वक़्त कि दम टूट रहा होउस वक़्त मुझे चेहरा-ए-पुर-नूर दिखाना

सरकार ! मुझे नज़'अ में मत छोड़ना तनहातुम आ के मुझे सूरा-ए-यासीन सुनाना

जब गोर-ए-ग़रीबाँ को चले मेरा जनाज़ारहमत की रिदा इस पे ख़ुदा-रा तुम उढ़ाना

जब क़ब्र में अहबाब चलें मुझ को लिटा करऐ प्यारे नबी ! गोर की वहशत से बचाना

तय ख़ैर से तदफ़ीन के हों सारे मराहिलहो क़ब्र का भी लुत्फ़ से आसान दबाना

जिस वक़्त नकीरैन करें आ के सुवालातआक़ा ! मुझे तुम आ के जवाबात सिखाना

सुन रक्खा है होता है बड़ा सख़्त अँधेरातुर्बत में मेरी नूर का फ़ानूस जलाना

जब क़ब्र की तन्हाई में घबराए मेरा दिलदेने को दिलासा शह-ए-अबरार तो आना

जब रोज़-ए-क़यामत रहे इक मील पे सूरजकौसर का छलकता मुझे इक जाम पिलाना

हो 'अर्सा-ए-महशर में मेरा चाक न पर्दालिल्लाह मुझे दामन-ए-रहमत में छुपाना

महशर में हिसाब आह ! मैं दे ही न सकूँगारहमत न हुई, होगा जहन्नम में ठिकाना

फ़रमाएँगे जिस वक़्त ग़ुलामों की शफ़ा'अतमैं भी हूँ ग़ुलाम आप का, मुझ को न भुलाना

फ़रमा के शफ़ा'अत मेरी, ऐ शाफ़े'-ए-महशर !दोज़ख़ से बचा कर मुझे जन्नत में बसाना

या शाह-ए-मदीना ! मह-ए-रमज़ान का सदक़ाजन्नत में पड़ोसी मुझे तुम अपना बनाना

अल्लाह की रहमत से ये मायूस नहीं हैहो जाएगा अत्तार की बख़्शिश का बहाना

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