नात लिरिक्स

Ya Ilahi Har Jagah Teri Ata Ka Saath Ho

या इलाही हर जगह तेरी अता का साथ हो

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या इलाही ! हर जगह तेरी 'अता का साथ होजब पड़े मुश्किल, शह-ए-मुश्किल-कुशा का साथ हो

या इलाही ! भूल जाऊँ नज़'अ की तकलीफ़ कोशादी-ए-दीदार-ए-हुस्न-ए-मुस्तफ़ा का साथ हो

या इलाही ! गोर-ए-तीरा की जब आए सख़्त रातउन के प्यारे मुँह की सुब्ह-ए-जाँ-फ़िज़ा का साथ हो

या इलाही ! जब पड़े महशर में शोर-ए-दार-ओ-गीरअम्न देने वाले प्यारे पेशवा का साथ हो

या इलाही ! जब ज़बानें बाहर आएँ प्यास सेसाहिब-ए-कौसर शह-ए-जूद-ओ-'अता का साथ हो

या इलाही ! सर्द-मेहरी पर हो जब ख़ुर्शीद-ए-हश्रसय्यिद-ए-बे-साया के ज़िल्ल-ए-लिवा का साथ हो

या इलाही ! गर्मी-ए-महशर से जब भड़कें बदनदामन-ए-महबूब की ठंडी हवा का साथ हो

या इलाही ! नामा-ए-आ'माल जब खुलने लगें'ऐब-पोश-ए-ख़ल्क़ सत्तार-ए-ख़ता का साथ हो

या इलाही ! जब बहें आँखें हिसाब-ए-जुर्म मेंउन तबस्सुम-रेज़ होंटों की दु'आ का साथ हो

या इलाही ! जब हिसाब-ए-ख़ंदा-ए-बे-जा रुलाएचश्म-ए-गिर्यान-ए-शफ़ी'-ए-मुर्तजा का साथ हो

या इलाही ! रंग लाएँ जब मेरी बे-बाकियाँउन की नीची नीची नज़रों की हया का साथ हो

या इलाही ! जब चलूँ तारीक-राह-ए-पुल-सिरातआफ़्ताब-ए-हाशिमी नूरुल-हुदा का साथ हो

या इलाही ! जब सर-ए-शमशीर पर चलना पड़ेरब्बे सल्लिम कहने वाले ग़म-ज़िदा का साथ हो

या इलाही ! जो दु'आए नेक मैं तुझ से करूँक़ुदसियों के लब से आमीं रब्बना का साथ हो

या इलाही ! जब रज़ा ख़्वाब-ए-गिराँ से सर उठाएदौलत-ए-बेदार-ए-'इश्क़-ए-मुस्तफ़ा का साथ हो

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