नात लिरिक्स

Wohi Rab Hai Jis Ne Tujh Ko Hamatan Karam Banaya

वही रब है जिस ने तुझ को हमा-तन करम बनाया

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

वही रब है जिस ने तुझ को हमा-तन करम बनायाहमें भीक माँगने को तेरा आस्ताँ बतायातुझे हम्द है, ख़ुदाया !

तुम्हीं हाकिम-ए-बराया, तुम्हीं क़ासिम-ए-'अतायातुम्हीं दाफ़े'-ए-बलाया, तुम्हीं शाफ़े'-ए-ख़तायाकोई तुम सा कौन आया

वो कुँवारी पाक मरयम, वो "नफ़ख़्तु-फ़ीह" का दमहै 'अजब निशान-ए-आ'ज़म, मगर आमिना का जायावही सब से अफ़्ज़ल आया

यही बोले सिदरा वाले, चमन-ए-जहाँ के थालेसभी मैं ने छान डाले, तेरे पाए का न पायातुझे यक ने यक बनाया

फ़-इज़ा फ़रग़्त फ़न्सब, ये मिला है तुम को मंसबजो गदा बना चुके अब उठो वक़्त-ए-बख़्शिश आयाकरो क़िस्मत-ए-'अताया

व-इलल-इलाहि-फ़र्ग़ब, करो 'अर्ज़ सब के मतलबकि तुम्हीं को तकते हैं सब, करो उन पर अपना सायाबनो शाफ़े'-ए-ख़ताया

अरे ऐ ख़ुदा के बंदो ! कोई मेरे दिल को ढूँडोमेरे पास था अभी तो, अभी क्या हुआ ख़ुदाया !न कोई गया न आया

हमें, ऐ रज़ा ! तेरे दिल का पता चला ब-मुश्किलदर-ए-रौज़ा के मुक़ाबिल वो हमें नज़र तो आयाये न पूछ कैसा पाया

कभी ख़ंदा-ज़ेर-ए-लब है, कभी गिर्या सारी शब हैकभी ग़म कभी तरब है, न सबब समझ में आयान उसी ने कुछ बताया

कभी ख़ाक पर पड़ा है, सर-ए-चर्ख़ ज़ेर-ए-पा हैकभी पेश-ए-दर खड़ा है, सर-ए-बंदगी झुकायातो क़दम में 'अर्श पाया

कभी वो तपक कि आतिश, कभी वो टपक कि बारिशकभी वो हुजूम-ए-नालिश, कोई जाने अब्र छायाबड़ी जोशिशों से आया

कभी वो चहक कि बुलबुल, कभी वो महक कि ख़ुद-गुलकभी वो लहक कि बिल्कुल चमन-ए-जिनाँ खिलायागुल-ए-क़ुद्स लहलहाया

कभी ज़िंदगी के अरमाँ, कभी मर्ग-ए-नौ का ख़्वाहाँवो जिया कि मर्ग क़ुर्बां, वो मुआ कि ज़ीस्त लायाकहे रूह हाँ जिलाया

कभी गुम कभी 'अयाँ है, कभी सर्द-गह तपाँ हैकभी ज़ेर-ए-लब फ़ुग़ाँ है, कभी चुप कि दम न था यारुख़-ए-काम जाँ दिखाया

ये तसव्वुरात-ए-बातिल, तेरे आगे क्या हैं मुश्किलतेरी क़ुदरतें हैं कामिल, इन्हें रास्त कर ख़ुदाया !मैं उन्हें शफ़ी'अ लाया

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