नात लिरिक्स

Wo Tayba Ki Galiyaan, Wo Zamzam Ka Paani

वो तयबा की गलियाँ, वो ज़मज़म का पानी

नात ख़्वान: संदली अहमदउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या अल्लाह ! अल्लाह अल्लाह ! या अल्लाह !या अल्लाह ! अल्लाह अल्लाह ! या अल्लाह !

वहाँ की फ़क़ीरी है रश्क-ए-अमीरीवहाँ पर बसर हो मेरी ज़िंदगानीए अल्लाह ! मेरे मुक़द्दर में लिख देवो तयबा की गलियाँ, वो ज़मज़म का पानी

वो तयबा की गलियाँ, वो ज़मज़म का पानीवो तयबा की गलियाँ, वो ज़मज़म का पानी

या अल्लाह ! अल्लाह अल्लाह ! या अल्लाह !या अल्लाह ! अल्लाह अल्लाह ! या अल्लाह !

वहाँ चार-सू रहमतों के उजालेवहाँ जा के आते हैं तक़दीर वालेवहाँ का सवेरा, करम की ज़मानतवहाँ एक पल में बदलती है क़िस्मतवहाँ हर तरफ़ जन्नतों के मनाज़िरवहाँ की हर इक शब सुहानी सुहानी

वो तयबा की गलियाँ, वो ज़मज़म का पानीवो तयबा की गलियाँ, वो ज़मज़म का पानी

या अल्लाह ! अल्लाह अल्लाह ! या अल्लाह !या अल्लाह ! अल्लाह अल्लाह ! या अल्लाह !

वहाँ आज तक हैं फ़रिश्तों के फेरेजहाँ चलते फिरते थे सरकार मेरेजहाँ हम को क़ुरआँ का तोहफ़ा मिला हैजहाँ बाब-ए-रहमत हमेशा खुला हैवहीं मेरी क़िस्मत का चमकेगा तारावहीं पर मिटेगी मेरी ना-तवानी

वो तयबा की गलियाँ, वो ज़मज़म का पानीवो तयबा की गलियाँ, वो ज़मज़म का पानी

या अल्लाह ! अल्लाह अल्लाह ! या अल्लाह !या अल्लाह ! अल्लाह अल्लाह ! या अल्लाह !

वो गलियाँ, वो महबूब-ए-दावर की गलियाँवो गलियाँ, वो साक़ी-ए-कौसर की गलियाँवो गलियाँ, जहाँ नूर ही नूर हर-सूअभी तक है जिन में मुहम्मद की ख़ुश्बूअभी तक करम की घटाओं के मंज़रअभी तक वोही रुत है सदियों पुरानी

वो तयबा की गलियाँ, वो ज़मज़म का पानीवो तयबा की गलियाँ, वो ज़मज़म का पानी

या अल्लाह ! अल्लाह अल्लाह ! या अल्लाह !या अल्लाह ! अल्लाह अल्लाह ! या अल्लाह !

जो ज़ालिम थे, हर ज़ुल्म उन से छुड़ायाकि आदम के बेटों को जीना सिखायावो मोहताज, जिन के नहीं थे ठिकानेगले से लगाया मेरे मुस्तफ़ा नेजहाँ पर ग़रीबों को 'इज़्ज़त मिली हैयतीमों ने पाई वहाँ शादमानी

वो तयबा की गलियाँ, वो ज़मज़म का पानीवो तयबा की गलियाँ, वो ज़मज़म का पानी

या अल्लाह ! अल्लाह अल्लाह ! या अल्लाह !या अल्लाह ! अल्लाह अल्लाह ! या अल्लाह !

वहीं से मिली हम को ईमाँ की दौलतवहीं से दो-'आलम पे बरसी है रहमतवो ऐसा नगर जिस पे जन्नत निछावरउसी सर-ज़मीं पर है अल्लाह का घरवो ऐसी ज़मीं, आसमाँ जिस को चूमेजहाँ सो रहा है दो-'आलम का बानी

वो तयबा की गलियाँ, वो ज़मज़म का पानीवो तयबा की गलियाँ, वो ज़मज़म का पानी

या अल्लाह ! अल्लाह अल्लाह ! या अल्लाह !या अल्लाह ! अल्लाह अल्लाह ! या अल्लाह !

ख़ुदा-वंदा ! मुझ पर ये एहसान कर देकभी मुझ को का'बे का मेहमान कर देदर-ए-मुस्तफ़ा पर मैं पलकें बिछाऊँकभी भी वहाँ से मैं वापस न आऊँइसी धुन में, इक़बाल ! आया बुढ़ापाइसी आरज़ू में कटी है जवानी

वो तयबा की गलियाँ, वो ज़मज़म का पानीवो तयबा की गलियाँ, वो ज़मज़म का पानी

या अल्लाह ! अल्लाह अल्लाह ! या अल्लाह !या अल्लाह ! अल्लाह अल्लाह ! या अल्लाह !

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