नात लिरिक्स

Nabi Ki Naat Padhta Hun Dil-e-Muztar Machalta Hai

नबी की नात पढ़ता हूँ दिल-ए-मुज़्तर मचलता है

नात ख़्वान: संदली अहमदशायर: रिज़वान महबूबीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

नबी की ना'त पढ़ता हूँ, दिल-ए-मुज़्तर मचलता हैख़ुदा के फ़ज़्ल से मेरा मुक़द्दर भी सँवरता है

जो 'आशिक़ है इमाम-उल-अंबिया का वो तसव्वुर मेंयहीं से गुंबद-ए-ख़ज़रा का जल्वा देख लेता है

नबी से जिस को उल्फ़त है वही जन्नत में जाएगाबिलाली 'इश्क़ दुनिया में यही ए'लान करता है

नबी के 'इश्क़ में पढ़ ले नमाज़-ए-पंजगाना जोउसी का दिल चमकता है, उसी का रुख़ चमकता है

बहुत ही ख़ूबसूरत है मेरे सरकार का रौज़ाकोई जब देख लेता है ज़माना भूल जाता है

इशारा आप का पा कर हजर भी बोल उठते हैंदु'आ से आप की सूरज पलट कर लौट आता है

मुसीबत जब भी आती है, तेरा मैं नाम लेता हूँतेरी तौसीफ़ के सदक़े मेरा हर काम बनता है

दिखा दे मुझ को भी, मौला ! रसूल-ए-पाक का रौज़ामदीना देखने को दिल मेरा हर पल मचलता है

सुकून-ए-क़ल्ब मिलता है, दिवाने झूम जाते हैंकि रिज़वाँ झूम कर जब भी नबी की ना'त पढ़ता है

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।