नात लिरिक्स

Wo Sue Lalazar Phirte Hain

वो सू-ए-लालाज़ार फिरते हैं

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

वो सू-ए-लालाज़ार फिरते हैंतेरे दिन, ऐ बहार ! फिरते हैं

जो तेरे दर से यार फिरते हैंदर-ब-दर यूँ ही ख़्वार फिरते हैं

आह कल 'ऐ़श तो किये हम नेआज वो बे-क़रार फिरते हैं

उन के ईमा से दोनों बागों परख़ैल-ए-लैल-ओ-नहार फिरते हैं

हर चराग़-ए-मज़ार पर क़ुदसीकैसे परवाना-वार फिरते हैं

उस गली का गदा हूँ मैं जिस मेंमाँगते ताजदार फिरते हैं

जान हैं जान क्या नज़र आएक्यूँ 'अदू गिर्द-ए-ग़ार फिरते हैं

फूल क्या देखूँ मेरी आँखों मेंदश्त-ए-तयबा के ख़ार फिरते हैं

लाखों क़ुदसी हैं काम-ए-ख़िदमत परलाखों गिर्द-ए-मज़ार फिरते हैं

वर्दियाँ बोलते हैं हरकारेपहरा देते सवार फिरते हैं

रखिए जैसे हैं ख़ाना-ज़ाद हैं हममोल के 'ऐबदार फिरते हैं

हाए ग़ाफ़िल ! वो क्या जगह है जहाँपाँच जाते हैं चार फिरते हैं

बाएँ रस्ते न जा, मुसाफ़िर ! सुनमाल है, राह-मार फिरते हैं

जाग सुनसान बन है रात आईगुर्ग बहर-ए-शिकार फिरते हैं

नफ़्स ये कोई चाल है ज़ालिमजैसे ख़ास-ए-बिजार फिरते हैं

कोई क्यूँ पूछे तेरी बात, रज़ा !तुझ से कुत्ते हज़ार फिरते हैं

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