नात लिरिक्स

Wo Raza Mera Raza Mera Raza Mera Raza Hai

वो रज़ा मेरा रज़ा मेरा रज़ा मेरा रज़ा है

नात ख़्वान: सज्जाद निज़ामीशायर: सज्जाद निज़ामीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा हैवो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है

वो इमाम 'इश्क़-ओ-मोहब्बत है बरेली का रज़ाजिस ने कोई न किया काम है सुन्नत के सिवा

वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा हैवो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है

वाज़ेह सभी पे आयत-ए-क़ुरआन कर गयामहफूज़ सुन्नियों का जो ईमान कर गयाएहसान का न जिस के कोई भी हिसाब है

वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा हैवो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है

उठा क़लम तो 'इल्म के दरिया बहा दिएघर घर नबी के ज़िक्र के जल्से सजा दिएसर-ता-पा 'इल्म-ए-दीन का जो आफ़ताब है

वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा हैवो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है

जिस की हयात 'इश्क़-ए-नबी की किताब हैजिस का वुजूद वक़्फ़-ए-रिसालत-मआब हैजिस में नबी की ख़ुश्बू है ऐसा ग़ुलाब है

वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा हैवो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है

हर दम चमकता और दमकता रहेगा वोदुनिया-ए-सुन्नियत में महकता रहेगा वोजिस में नबी की ख़ुश्बू है ऐसा ग़ुलाब है

वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा हैवो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है

गुस्ताख़ी-ए-रसूल का नश्शा उतार देंहम चाहें तो इसी से वहाबी को मार देंअहमद रज़ा के नाम में वो आब-ओ-ताब है

वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा हैवो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है

उर्दू अदब की जान है और शान है रज़ाना'त-ए-नबी का हिन्द में हस्सान है रज़ानग़्मों में जिस के हुब्ब-ए-नबी की शराब है

वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा हैवो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है

अहमद रज़ा ने कंज़-उल-ईमान है दियाहम को रसूल-ए-पाक का फ़ैज़ान है दियाजो मस्लक-ए-रज़ा पे चले, कामियाब है

वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा हैवो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है

अख़्तर रज़ा का दामन-ए-शफ़क़त न छोड़ियेकुछ भी हो दस्त-ए-ताज-ए-शरी'अत न छोड़ियेवल्लाह ! फ़ख़्र-ए-अज़हरी 'इज़्ज़त-मआब है

वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा हैवो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है

होता है जिस का ज़िक्र ज़माने में कू-ब-कूशोहरत है जिस के फ़त्वे की, तक़्वे की चार-सूसज्जाद ! हर इमाम का वो इंतिख़ाब है

वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा हैवो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है

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