नात लिरिक्स

Haider Ka Gharana Karbal Mein Kya Zulm Anokhe Sehta Hai

हैदर का घराना कर्बल में क्या ज़ुल्म अनोखे सहता है

नात ख़्वान: सज्जाद निज़ामीशायर: सज्जाद निज़ामीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हैदर का घराना कर्बल में क्या ज़ुल्म अनोखे सहता हैप्यासे हैं मुहम्मद के प्यारे और सामने दरिया बहता है

दिल डूब गया है बानो का और ख़ून का दरिया बहता हैजिस झूले में असग़र सोते थे, दो दिन से वो ख़ाली रहता है

ज़ैनब की नज़र है चौखट पर और कान लगे हैं आहट परजब कोई दुलारा बाहर हो तो माँ को खटका रहता है

ऐ कूफ़ियो ! क्या पाया तुम ने, उन पर ही सितम ढाया तुम नेजिस घर का हर बच्चा बच्चा सरकार से निस्बत रखता है

ऐ शिम्र-ए-लईं ज़ालिम ! तू ने, क्या शाही गला काटा तू नेबह जाते हैं आँखों से आँसू वो मंज़र सामने आता है

सज्जाद ! शहीदों का ग़म है, जितना ही लिखो उतना कम हैहर साल मुहर्रम में घर घर शब्बीर का चर्चा होता है

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