नात लिरिक्स

Maine Ye Kab Kaha Mujhe Duniya Ka Maal De | Mujh Ko Gada Bana Ke Madine Mein Daal De

मैं ने ये कब कहा मुझे दुनिया का माल दे | मुझ को गदा बना के मदीने में डाल दे

नात ख़्वान: सज्जाद निज़ामीशायर: सज्जाद निज़ामीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मैं ने ये कब कहा मुझे दुनिया का माल देमुझ को गदा बना के मदीने में डाल दे

कहते रहे बिलाल यही हर मक़ाम परनिकलेगी मेरी जान मुहम्मद के नाम परऐसा ही मेरे सीने में 'इश्क़-ए-बिलाल देमुझ को गदा बना के मदीने में डाल दे

जो भी हुज़ूर को कहें अपनी तरह बशरबिस्तर उठाए फिरते रहेंगे वो दर-ब-दरऐसे मुनाफ़िक़ों को जहाँ से निकाल देमुझ को गदा बना के मदीने में डाल दे

मुद्दत से मेरे दिल में बसी है ये आरज़ूजल्वा रसूल-ए-पाक का देखूँ मैं रू-ब-रूमौला ! तू मेरे क़ल्ब की हसरत निकाल देमुझ को गदा बना के मदीने में डाल दे

अब 'अक़्ल कह रही है कि तू दिल से काम लेक्यूँ डूबता है ले मेरे आक़ा का नाम लेतुझ को अभी किनारे ये दरिया उछाल देमुझ को गदा बना के मदीने में डाल दे

ता-ज़िंदगी हुज़ूर की ना'तें लिखा करूँसज्जाद ! अपने रब से मैं इतनी दु'आ करूँफ़िक्र-ए-रज़ा दे, जामी का हुस्न-ए-ख़याल देमुझ को गदा बना के मदीने में डाल दे

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