नात लिरिक्स

Darbar-e-Mustafa Ke Jo Darban Ho Gaye

दरबार-ए-मुस्तफ़ा के जो दरबान हो गए

नात ख़्वान: सज्जाद निज़ामीशायर: सज्जाद निज़ामीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दरबार-ए-मुस्तफ़ा के जो दरबान हो गएवो लोग काएनात के सुल्तान हो गए

जन्नत खड़ी है लेने को आग़ोश में उन्हेंजो भी रसूल-ए-पाक पे क़ुर्बान हो गए

नज्दी से कह दो हम पे न डाले बुरी नज़रअहमद रज़ा हमारे निगहबान हो गए

ख़ाक-ए-दर-ए-हुसैन को जिस ने भी मल लियाउस पर सितारे-चाँद भी क़ुर्बान हो गए

रू-ए-नबी पे जिस घड़ी उन की नज़र पड़ीआए थे क़त्ल करने मुसलमान हो गए

कोई किसी के पीछे, किसी का कोई इमामहम मुक़तदी-ए-हज़रत-ए-हस्सान हो गए

सज्जाद ! ये निगाह-ए-नबुव्वत का फ़ैज़ थाख़्वाजा पिया जो हिन्द के सुल्तान हो गए

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