नात लिरिक्स

Karbala Mein Jane Ka Sirf Ik Bahana Tha

कर्बला में जाने का सिर्फ़ इक बहाना था

नात ख़्वान: सज्जाद निज़ामीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कर्बला में जाने का सिर्फ़ इक बहाना थामुस्तफ़ा की उम्मत को रब से बख़्शवाना था

कर्बला में जाने का सिर्फ़ इक बहाना थाज़ालिमों के हाथों से दीन को बचाना था

शीर-ख़्वार बच्चे को हँस के तीर खाना थाशौक़ था शहादत का, प्यास का बहाना था

कर्बला के ज़र्रों से ये सदाएँ आती हैख़ाक-ए-कर्बला तुझ को आसमाँ बनाना था

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