नात लिरिक्स

Wo Kamal-e-Husn-e-Huzoor Hai Ki Guman-e-Naqs Jahan Nahin

वो कमाल-ए-हुस्न-ए-हुज़ूर है कि गुमान-ए-नक़्स जहाँ नहीं

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

वो कमाल-ए-हुस्न-ए-हुज़ूर है कि गुमान-ए-नक़्स जहाँ नहींयही फूल ख़ार से दूर है, यही शम'अ है कि धुवाँ नहीं

दो जहाँ की बेहतरियाँ नहीं कि अमानी-ए-दिल-ओ-जाँ नहींकहो क्या है वो जो यहाँ नहीं, मगर इक नहीं कि वो हाँ नहीं

मैं निसार तेरे कलाम पर, मिली यूँ तो किस को ज़बाँ नहींवो सुख़न है जिस में सुख़न न हो, वो बयाँ है जिस का बयाँ नहीं

ब-ख़ुदा ख़ुदा का यही है दर, नहीं और कोई मफ़र मक़रजो वहाँ से हो यहीं आ के हो, जो यहाँ नहीं तो वहाँ नहीं

करे मुस्त़फ़ा की इहानतें, खुले बंदों उस पे ये जुरअतेंकि मैं क्या नहीं हूँ मुहम्मदी ! अरे हाँ नहीं अरे हाँ नहीं

तेरे आगे यूँ हैं दबे-लचे, फ़ुसहा 'अरब के बड़े बड़ेकोई जाने मुँह में ज़बाँ नहीं, नहीं बल्कि जिस्म में जाँ नहीं

वो शरफ़ कि क़त'अ हैं निस्बतें, वो करम कि सब से क़रीब हैंकोई कह दो यास-ओ-उमीद से, वो कहीं नहीं वो कहाँ नहीं

ये नहीं कि ख़ुल्द न हो निकू, वो निकूई की भी है आबरूमगर, ऐ मदीने की आरज़ू ! जिसे चाहे तू वो समाँ नहीं

है उन्हीं के नूर से सब 'अयाँ, है उन्हीं के जल्वे में सब निहाँबने सुब्ह ताबिश-ए-मेहर से, रहे पेश-ए-मेहर ये जाँ नहीं

वही नूर-ए-हक़, वही ज़िल्ल-ए-रब, है उन्हीं से सब, है उन्हीं का सबनहीं उन की मिल्क में आस्माँ कि ज़मीं नहीं कि ज़माँ नहीं

वही ला-मकाँ के मकीं हुए, सर-ए-'अर्श तख़्त-नशीं हुएवो नबी है जिस के हैं ये मकाँ, वो ख़ुदा है जिस का मकाँ नहीं

सर-ए-'अर्श पर है तेरी गुज़र, दिल-ए-फ़र्श पर है तेरी नज़रमलकूत-ओ-मुल्क में कोई शय नहीं वो जो तुझ पे 'अयाँ नहीं

करूँ तेरे नाम पे जाँ फ़िदा, न बस एक जाँ दो जहाँ फ़िदादो जहाँ से भी नहीं जी भरा करूँ क्या करोरों जहाँ नहीं

तेरा क़द तो नादिर-ए-दहर है, कोई मिस्ल हो तो मिसाल देनहीं गुल के पौदों में डालियाँ कि चमन में सर्व-ए-चमाँ नहीं

नहीं जिस के रंग का दूसरा, न तो हो कोई न कभी हुआकहो उस को गुल कहे क्या बनी कि गुलों का ढेर कहाँ नहीं

करूँ मदह-ए-अहल-ए-दुवल, रज़ा ! पड़े इस बला में मेरी बलामैं गदा हूँ अपने करीम का, मेरा दीन पारा-ए-नाँ नहीं

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