नात लिरिक्स

Wo Jo Chaahen Chaand Ko Tod Den, Unhen Ikhtiyaar Diya Gaya

वो जो चाहें चाँद को तोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया

नात ख़्वान: सरवर हुसैन नक़्शबंदीशायर: हनीफ़ नाज़िशउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

वो जो चाहें चाँद को तोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गयावो फिर उस के टुकड़ों को जोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया

जो 'अली की 'अस्र क़ज़ा हुई, तो वो वक़्त पर ही अदा हुईछुपे आफ़ताब को मोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया

किसी उम्मती को सक़र के रुख़ लिए जा रहे हों मलाइकावो पकड़ के ख़ुल्द को मोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया

वो नबी की मुट्ठी का मो'जिज़ा कि 'वमा रमैत' कहे ख़ुदावो निगाह कुफ़्र की फोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया

लिखो, नाज़िश ! उन का ये मो'जिज़ा कि किसी की आँख निकल गईतो लु'आब-ए-पाक से जोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया

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