वो जो चाहें चाँद को तोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गयावो फिर उस के टुकड़ों को जोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया
जो 'अली की 'अस्र क़ज़ा हुई, तो वो वक़्त पर ही अदा हुईछुपे आफ़ताब को मोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया
किसी उम्मती को सक़र के रुख़ लिए जा रहे हों मलाइकावो पकड़ के ख़ुल्द को मोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया
वो नबी की मुट्ठी का मो'जिज़ा कि 'वमा रमैत' कहे ख़ुदावो निगाह कुफ़्र की फोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया
लिखो, नाज़िश ! उन का ये मो'जिज़ा कि किसी की आँख निकल गईतो लु'आब-ए-पाक से जोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया
wo jo chaahe.n chaand ko to.D de.nunhe.n iKHtiyaar diya gayawo phir us ke Tuk.Do.n ko jo.D de.nunhe.n iKHtiyaar diya gaya
jo 'ali ki 'asr qaza huito wo waqt par hi ada huichhupe aaftaab ko mo.D de.nunhe.n iKHtiyaar diya gaya
kisi ummati ko saqar ke ruKHliye jaa rahe ho.n malaaikawo paka.D ke KHuld ko mo.D de.nunhe.n iKHtiyaar diya gaya
wo nabi ki muTThi ka mo'jizaki 'wamaa ramait' kahe KHudawo nigaah kufr ki pho.D de.nunhe.n iKHtiyaar diya gaya
likho, Naazish ! un ka ye mo'jizaki kisi ki aankh nikal gaito lu'aab-e-paak se jo.D de.nunhe.n iKHtiyaar diya gaya
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