नात लिरिक्स

Dil Ulfat-e-Sarkar Basane Ke Liye Hai

दिल उल्फ़त-ए-सरकार बसाने के लिए है

नात ख़्वान: सरवर हुसैन नक़्शबंदीशायर: सरवर हुसैन नक़्शबंदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दिल उल्फ़त-ए-सरकार बसाने के लिए हैजाँ आप की हुर्मत पे लुटाने के लिए है

दिल कहने लगा करते ही रौज़े का नज़ाराये नक़्श तो आँखों में सजाने के लिए है

कितनी बड़ी ने'मत है ये आक़ा का वसीलाबंदों को जो मौला से मिलाने के लिए है

आती है जो आँखों में नमी ना'त से पहलेये मदह के आदाब सिखाने के लिए है

पैग़ाम सुनाती है यही आया-ए-ततहीर'इज़्ज़त मेरे आक़ा के घराने के लिए है

हम उम्मती उन के हैं तो कैसे रहें महरूमजब उन का करम सारे ज़माने के लिए है

सरवर ! जो बुलावा नहीं आया कई दिन सेये तेरी तलब और बढ़ाने के लिए है

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