नात लिरिक्स

Hamari Ho Nigehbani Ba-haqq-e-Shah-e-Jilani | Ilahi Khair Gardani Ba-haqq-e-Shah-e-Jilani

हमारी हो निगहबानी ब-हक़्क़-ए-शाह-ए-जीलानी | इलाही ख़ैर गर्दानी ब-हक़्क़-ए-शाह-ए-जीलानी

नात ख़्वान: सरवर हुसैन नक़्शबंदीशायर: सरवर हुसैन नक़्शबंदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हमारी हो निगहबानी, ब-हक़्क़-ए-शाह-ए-जीलानीइलाही ! ख़ैर गर्दानी, ब-हक़्क़-ए-शाह-ए-जीलानी

मेरे मौला ! 'अता करना हमेशा इस वसीले सेहर इक मुश्किल में आसानी, ब-हक़्क़-ए-शाह-ए-जीलानी

तू मालिक है ख़ज़ानों का, करम से दूर फ़रमा देहमारी तंग-दामानी, ब-हक़्क़-ए-शाह-ए-जीलानी

ख़ुदाया ! दीन-ओ-दुनिया की हर इक ने'मत 'अता कर देब-हक़्क़-ए-शाह-ए-जीलानी, ब-हक़्क़-ए-शाह-ए-जीलानी

ज़माना देख कर हैरान है, हम लोग करते हैंगदाई में भी सुल्तानी, ब-हक़्क़-ए-शाह-ए-जीलानी

ब-रोज़-ए-हश्र दाएँ हाथ में आ'माल-नामा होरहे पुर-नूर पेशानी, ब-हक़्क़-ए-शाह-ए-जीलानी

हमारी ख़स्ता-हाली पर, ख़ुदाया ! तेरी रहमत कीरहे हर दम फ़रावानी, ब-हक़्क़-ए-शाह-ए-जीलानी

वसीला भी ज़रूरी है, जभी सरवर ! ये कहते हैंइलाही ! ख़ैर गर्दानी, ब-हक़्क़-ए-शाह-ए-जीलानी

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