नात लिरिक्स

Un Ki Chaukhat Ho To Kasa Bhi Pada Sajta Hai | Un Ki Chokhat Ho To Kasa Bhi Para Sajta Hai

उन की चौखट हो तो कासा भी पड़ा सजता है

नात ख़्वान: सरवर हुसैन नक़्शबंदीशायर: सरवर हुसैन नक़्शबंदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

उन की चौखट हो तो कासा भी पड़ा सजता हैदर बड़ा हो तो सवाली भी खड़ा सजता है

ऐसा आक़ा हो तो लाज़िम है ग़ुलामी पे ग़ुरूरऐसी निस्बत हो तो फिर बोल बड़ा सजता है

ताज-ए-शाही के मुक़द्दर में ये ज़ेबाई कहाँजिस क़दर उन की ग़ुलामी का कड़ा सजता है

ये ग़ुलामी कहीं कमतर नहीं होने देतीउन का नौकर हो तो शाहों में खड़ा सजता है

कान में हुर्र के मुक़द्दर ने ये सरगोशी कीतू नगीना है, अँगूठी में जड़ा सजता है

सरवर-ए-दीं के मुसल्ले पे ख़ुदा जानता हैमुर्तज़ा पीछे हो, सिद्दीक़ खड़ा सजता है

सरवर-ए-दीं के मुसल्ले पे ख़ुदा जानता हैआगे असहाब के सिद्दीक़ खड़ा सजता है

जब 'अता करने पे बैठें हों 'अली-ओ-सय्यिदाफिर तो जन्नत के लिए कोई अड़ा सजता है

मौला शब्बर से ख़ुदा जाने सख़ी महदी तकगुलशन-ए-ज़हरा का हर फूल बड़ा सजता है

मुझ से कहते हैं यही अहल-ए-मोहब्बत, सरवर !ना'त का नग़्मा तेरे लब पे बड़ा सजता है

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