नात लिरिक्स

Hamari Sansen Rawan Hain Jab Tak Nabi Ki Madh-o-Sana Karenge

हमारी साँसें रवाँ हैं जब तक नबी की मदह-ओ-सना करेंगे

नात ख़्वान: सरवर हुसैन नक़्शबंदीशायर: सरवर हुसैन नक़्शबंदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हमारी साँसें रवाँ हैं जब तक, नबी की मदह-ओ-सना करेंगेरगों में जब तक लहू रवाँ है, नबी नबी हम सदा करेंगे

ज़माने भर की हर एक ने'मत उन्हीं के सदक़े ख़ुदा ने दी हैगर उन की 'इज़्ज़त पे हर्फ़ आया, हम अपनी 'इज़्ज़त को क्या करेंगे

जो दिल से नामूस-ए-मुस्तफ़ा को तुम आज भी हिर्ज़-ए-जाँ बना लोयक़ीन कर लो कि हम-नवाई तुम्हारी अर्ज़-ओ-समा करेंगे

ये दीन-ओ-दुनिया की सरफ़राज़ी जो चाहते हो ख़ुदा से अपनेतो सिद्क़-ए-दिल से ये अहद कर लो कि हम नबी से वफ़ा करेंगे

ख़ुदा गवाह इस की क़द्र-ओ-क़ीमत का 'इल्म होगा ब-रोज़-ए-महशरजो अपने बच्चों में आज पैदा मोहब्बत-ए-मुस्तफ़ा करेंगे

वो लाख पर्दों में छुप के बैठें तो ढूँढ लेगा कोई दीवानाये भूल जाएँ नबी के दुश्मन कि चैन से वो जिया करेंगे

वो जिन के दस्त-ए-करम में हक़ ने शफ़ा'अतों का 'अलम दिया हैहम उस नबी के हैं नाम-लेवा, उन्हीं पे तन मन फ़िदा करेंगे

ख़ुदा ने भेजा है उन को, सरवर ! बना के दोनों जहाँ की रहमतये जाँ मिली है उन्हीं के सदक़े, उन्हीं की ख़ातिर फ़िदा करेंगे

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