नात लिरिक्स

Wo Jis Ke Liye Mehfil-e-Kaunain Saji Hai | Wo Mera Nabi, Mera Nabi, Mera Nabi Hai

वो जिस के लिए महफ़िल-ए-कौनैन सजी है | वो मेरा नबी, मेरा नबी, मेरा नबी है

नात ख़्वान: हाफ़िज़ अमानुल्लाह क़ाज़ीशायर: क़ारी एहसान मोहसिनउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

वो जिस के लिए महफ़िल-ए-कौनैन सजी हैफ़िरदौस-ए-बरीं जिस के वसीले से बनी हैवो हाश्मी, मक्की, मदनी-उल-'अरबी हैवो मेरा नबी, मेरा नबी, मेरा नबी है

अल्लाह का फ़रमाँ, अलम् नश्रह़् लक स़द्रकमंसूब है जिस से, व-रफ़'अना लक ज़िक्रकजिस ज़ात का क़ुरआन में भी ज़िक्र-ए-जली हैवो मेरा नबी, मेरा नबी, मेरा नबी है

अहमद है, मुहम्मद है, वो ही ख़त्म-ए-रुसूल हैमख़दूम-ओ-मुरब्बी है, वो ही वाली-ए-कुल हैउस पर ही नज़र सारे ज़माने की लगी हैवो मेरा नबी, मेरा नबी, मेरा नबी है

व-श्शम्सुद्दुहा चेहरा-ए-अनवर की झलक हैवलैल सजा गेसू-ए-हज़रत की लचक है'आलम को ज़िया जिस के वसीले से मिली हैवो मेरा नबी, मेरा नबी, मेरा नबी है

मुज़म्मिल-ओ-यासीन व मुदद्स़्स़िर-ओ-त़ाहाक्या क्या नए अल्क़ाब से मौला ने पुकाराक्या शान है उस की, कि जो उम्मी-लक़बी हैवो मेरा नबी, मेरा नबी, मेरा नबी है

यासीन-ओ-मुज़म्मिल-ओ-मुदद्स़्स़िर और त़ाहाक्या क्या नए अल्क़ाब से मौला ने पुकाराक्या शान है उस की, कि जो उम्मी-लक़बी हैवो मेरा नबी, मेरा नबी, मेरा नबी है

वो ज़ात कि जो मज़हर-ए-लौलाक-लमा हैजो साहिब-ए-रफ़रफ़ शब-ए-मे'राज हुआ हैअसरा में इमामत जिसे नबियों की मिली हैवो मेरा नबी, मेरा नबी, मेरा नबी है

किस दर्जा ज़माने में थी मज़लूम ये औरतफिर जिस की बदौलत मिली इसे 'इज़्ज़त-ओ-रिफ़'अतवो मोहसिन-ओ-ग़म-ख़्वार हमारा ही नबी हैवो मेरा नबी, मेरा नबी, मेरा नबी है

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