नात लिरिक्स

Khwab-e-Ghaflat Mein Soe Hue Momino

ख़्वाब-ए-ग़फ़लत में सोए हुए मोमिनो

शायर: क़ारी एहसान मोहसिनउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़्वाब-ए-ग़फ़लत में सोए हुए मोमिनो !'ऐश-ओ-'इशरत बढ़ाने से क्या फ़ाइदाआँख खोलो उठो, याद रब को करो'उम्र यूँही गँवाने से क्या फ़ाइदा

ख़्वाब-ए-ग़फ़लत में सोए हुए मोमिनो !'ऐश-ओ-'इशरत बढ़ाने से क्या फ़ाइदा

अपने रब को जवानी में भूला है तूऔर ताक़त के बूते पे फूला है तूजब जवानी ढलेगी तो पछताएगाफिर यूँ रोने रुलाने से क्या फ़ाइदा

आँख खोलो उठो, याद रब को करो'उम्र यूँही गँवाने से क्या फ़ाइदा

था हुकूमत का फ़िर'औन को भी नशाज़ुल्म पर ज़ुल्म ख़ल्क़त पे करता रहाजब समंदर में डूबा तो कहने लगाइस हुकूमत के पाने से क्या फ़ाइदा

आँख खोलो उठो, याद रब को करो'उम्र यूँही गँवाने से क्या फ़ाइदा

कितना मशहूर क़िस्सा है शद्दाद कारूह जब उस के तन से निकाली गईमरता मरता भी लोगों से कहता गयाऐसी जन्नत बनाने से क्या फ़ाइदा

आँख खोलो उठो, याद रब को करो'उम्र यूँही गँवाने से क्या फ़ाइदा

मालदारी में मशहूर क़ारून थावो मुख़ालिफ़ था मूसा व हारून काजब ज़मीं में धँसाया तो कहने लगाऐसे बेजा ख़ज़ाने से क्या फ़ाइदा

आँख खोलो उठो, याद रब को करो'उम्र यूँही गँवाने से क्या फ़ाइदा

क़ाबिल-ए-ज़िक्र क़िस्सा है नमरूद कावो भी इन्कार करता था मा'बूद काउस का मग़्ज़ एक मच्छर ने खा कर कहायूँ बड़ाई जताने से क्या फ़ाइदा

आँख खोलो उठो, याद रब को करो'उम्र यूँही गँवाने से क्या फ़ाइदा

अपनी शोहरत पे, मोहसिन ! न तू यूँ मचलएक दिन आ दबोचेगी तुझ को अजलरूह को साफ़ कर, नेक आ'माल करसिर्फ़ ज़ाहिर बनाने से क्या फ़ाइदा

आँख खोलो उठो, याद रब को करो'उम्र यूँही गँवाने से क्या फ़ाइदा

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