नात लिरिक्स

Waqt Sehri Ka Ho Gaya Jago

वक़्त सहरी का हो गया जागो

नात ख़्वान: अश्फ़ाक़ अत्तारी मदनीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

वक़्त सहरी का हो गया, जागोनूर हर सम्त छा गया, जागो

माह-ए-रमज़ाँ के फ़र्ज़ हैं रोज़ेएक भी तुम न छोड़ना, जागो

उठो सहरी की कर लो तय्यारीरोज़ा रखना है आज का, जागो

उठो उठो वुज़ू भी कर लो औरतुम तहज्जुद करो अदा, जागो

चुस्कियाँ गर्म चाय की भर लोखा लो हल्की सी कुछ ग़िज़ा, जागो

होगी मक़बूल फ़ज़्ल-ए-मौला सेखा के सहरी करो दु'आ, जागो

खा के सहरी उठो अदा कर लोसुन्नत-ए-शाह-ए-अंबिया, जागो

तुम को मौला मदीना दिखलाएऔर हज भी करो अदा, जागो

तुम को रमज़ाँ के सदक़े मौला देउल्फ़त-ओ-'इश्क़-ए-मुस्तफ़ा, जागो

तुम को रमज़ान का मदीने मेंदे शरफ़ रब्ब-ए-मुस्तफ़ा, जागो

माह-ए-रमज़ाँ की बरकतें लूटोलूट लो रहमत-ए-ख़ुदा, जागो

कैसी प्यारी फ़ज़ा है रमज़ाँ कीदेख लो कर के आँख वा, जागो

रहमतों की झड़ी बरसती हैजल्द उठ कर के लो नहा, जागो

तुम को दीदार-ए-मुस्तफ़ा हो जाएहै ये 'अत्तार की दु'आ, जागो

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