नात लिरिक्स

Jalwa Hai Noor Hai Ki Sarapa Raza Ka Hai | Wadi Raza Ki Koh-e-Himala Raza Ka Hai

जल्वा है नूर है कि सरापा रज़ा का है | वादी रज़ा की कोह-ए-हिमाला रज़ा का है

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: प्रोफ़ेसर जमील नज़रउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जल्वा है, नूर है कि सरापा रज़ा का हैतस्वीर-ए-सुन्नियत है कि चेहरा रज़ा का है

वादी रज़ा की, कोह-ए-हिमाला रज़ा का हैजिस सम्त देखिये वो 'इलाक़ा रज़ा का है

जो उस ने लिख दिया है, सनद है वो दीन मेंअहल-ए-क़लम की आबरू नुक़्ता रज़ा का है

किस की मजाल है जो नज़र भी मिला सकेदरबार-ए-मुस्तफ़ा में ठिकाना रज़ा का है

अगलों ने तो लिखा है बहुत 'इल्म-ए-दीन परजो कुछ है इस सदी में वो तन्हा रज़ा का है

दरिया फ़साहतों के रवाँ शा'इरी में हैंये सहल-ए-मुमतना' है कि लहज़ा रज़ा का है

दस्तार आ रही है ज़मीं पर जो सर उठेकितना बुलंद आज फरेरा रज़ा का है

छूता है आसमान को मीनार 'अज़्म काया'नी अटल पहाड़ इरादा रज़ा का है

अल्फ़ाज़ बह रहे हैं दलीलों की धार परचलता हुवा क़लम है कि धारा रज़ा का है

इस दौर-ए-पुर-फ़ितन में, नज़र ! ख़ुश-'अक़ीदगीसरकार का करम है, वसीला रज़ा का है

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