नात लिरिक्स

Un Ki Mahak Ne Dil Ke Gunche Khila Diye Hain

उन की महक ने दिल के ग़ुंचे खिला दिये हैं

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

उन की महक ने दिल के ग़ुंचे खिला दिये हैंजिस राह चल गए हैं कूचे बसा दिये हैं

जब आ गई हैं जोश-ए-रहमत पे उन की आँखेंजलते बुझा दिये हैं, रोते हँसा दिये हैं

इक दिल हमारा क्या है, आज़ार इस का कितनातुम ने तो चलते फिरते मुर्दे जिला दिये हैं

उन के निसार कोई कैसे ही रंज में होजब याद आ गए हैं, सब ग़म भुला दिये हैं

हम से फ़क़ीर भी अब फेरी को उठते होंगेअब तो ग़नी के दर पर बिस्तर जमा दिये हैं

असरा में गुज़रे जिस दम बेड़े पे क़ुदसियों केहोने लगी सलामी, परचम झुका दिये हैं

आने दो या डुबो दो अब तो तुम्हारी जानिबकश्ती तुम्हीं पे छोड़ी लंगर उठा दिये हैं

दूल्हा से इतना कह दो, प्यारे ! सुवारी रोकोमुश्किल में हैं बराती, पुर-ख़ार बादिये हैं

अल्लाह क्या जहन्नम अब भी न सर्द होगारो रो के मुस्तफ़ा ने दरिया बहा दिये हैं

मेरे करीम से गर क़तरा किसी ने माँगादरिया बहा दिये हैं, दुर्र-बे-बहा दिये हैं

मुल्क-ए-सुख़न की शाही तुम को, रज़ा ! मुसल्लमजिस सम्त आ गए हो सिक्के बिठा दिये हैं

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