नात लिरिक्स

Un Ki Jali Wo Sama Aur Wo Rauza Un Ka

उन की जाली वो समाँ और वो रौज़ा उन का

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीशायर: सय्यिद शबाहत हुसैनउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

उन की जाली, वो समाँ और वो रौज़ा उन काकितना पुर-नूर है, वल्लाह ! वो कूचा उन का

देख कर गुंबद-ए-ख़ज़रा वो धड़कना दिल कायाद आता है मुझे रोज़ मदीना उन का

हैं अबू-बक्र-ओ-'उमर और ग़नी, मौला 'अलीबीच में चारों के बैठा है वो आक़ा उन का

रौज़ा-ए-सय्यिदा-ज़हरा से जो देखा मैं नेआज तक क़ैद है आँखों में नज़ारा उन का

हो गया नूर से मा'मूर ज़माना साराऐसा चमका था शब-ए-नूर वो चेहरा उन का

दो ही लफ़्ज़ों में बदल डाली 'उमर की दुनियाकितना मीठा था ख़ुदा जाने वो लहज़ा उन का

हश्र में आक़ा को मुँह कैसे दिखाएगा ज़लीलमुँह छुपा लेगा सर-ए-हश्र कमीना उन का

हूँ गुनहगार मगर फिर भी भरोसा है मुझेबख़्शवा लेगा मुझे हश्र में सज्दा उन का

सय्यिदा ही ने तो पाला है शबाहत को जनाबउन के ही नाम से मशहूर है बेटा उन का

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