नात लिरिक्स

Aye Saba Nabi Se Kehna Jo Madine Ko Tu Jaye

ऐ सबा नबी से कहना जो मदीने को तू जाए

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीशायर: सय्यिद शबाहत हुसैनउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ऐ सबा ! नबी से कहना जो मदीने को तू जाएतेरे दर की आरज़ू में ये दीवाना मर न जाए

तेरे ग़म में काश सरवर ! मेरी ज़िंदगी ये गुज़रेमुझे मौत भी जो आए तेरे शहर में ही आए

तपती हुई ज़मीं पर हज़रत बिलाल बोलेछूटे न उन का दामन, ये जान जाए जाए

कोई मिस्ल-ए-इब्न-ए-हैदर न हुआ है और न होगाजो सितम के तीर खाए और सज्दे में भी जाए

बेटी वो मुस्तफ़ा की कितनी 'अज़ीम-तर हैजो 'इशा में सर झुकाए और फ़ज्र में उठाए

जब ज़िक्र जन्नतों का वा'इज़ के लब पे आएतेरे 'आशिक़ों को, आक़ा ! तेरा शहर याद आए

सरकार की नज़र की, क्या बात है 'उमर कीवो जिधर जिधर से गुज़रें शैतान भाग जाए

जिसे मुस्तफ़ा दु'आ दें, आब-ए-दहन लगा देंफिर शेर वो ख़ुदा का ख़ैबर उखाड़ आए

जब ख़ुदकुशी के आगे सूरत नज़र न आएये मशवरा है मेरा, सज्दे में सर झुकाए

वालिद नहीं रहे अब तन्हा मैं रह गया हूँअब और चाहता हूँ तेरी रहमतों के साए

हर 'आशिक़-ए-नबी से कहता है ये शबाहतजिसे देखनी हो जन्नत, वो मदीना देख आए

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