नात लिरिक्स

Ban Ke Rehmat Koi Aata Hai Chala Jata Hai

बन के रहमत कोई आता है चला जाता है

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीशायर: अज़हर फ़ारूक़ी बरेलवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बन के रहमत कोई आता है, चला जाता हैसब को दामन में छुपाता है, चला जाता है

पाँव रुक जाते हैं सिदरा पे किसी के जा करऔर कोई आगे बढ़ाता है, चला जाता है

उन की आँखों से हर इक अश्क टपकने वालानार-ए-दोज़ख़ को बुझाता है, चला जाता है

ऐ शहंशाह-ए-मदीना ! ये महीना हज कामुझ को हर साल रुलाता है, चला जाता है

कहते रह जाते थे कुफ़्फ़ार, 'अली मौला तोआता है, सर को उड़ाता है, चला जाता है

सख़्त पहरे पे भी 'अब्बास-ए-'अलमदार-ए-वफ़ापानी चुल्लू में उठाता है, चला जाता है

मेरा साबिर वो वली है कि जनाज़ा अपनाआता है, ख़ुद ही पढ़ाता है, चला जाता है

जब भी घबराऊँ तो आता है मदीने से करममुझ को सीने से लगाता है, चला जाता है

हुक्म-ए-ख़्वाजा हो तो ख़ादिम भी अना-सागर कोएक कासे में उठाता है, चला जाता है

अब भी अजमेर में अब्दुल्लाह बयाबानी हैराह भटकों को दिखाता है, चला जाता है

मुश्किल आती है अगर कोई तो अशरफ़ का करममुझ को मुश्किल से छुड़ाता है, चला जाता है

एक ये भी तो करामत है मेरे अशरफ़ कीलड़की मूरत को बनाता है, चला जाता है

याद आता है जहाँ कर्ब-ओ-बला, ऐ अज़हर !दिल में एक दर्द जगाता है, चला जाता है

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