नात लिरिक्स

Umangein Josh Par Aain, Iraade Gudgudaate Hain

उमंगें जोश पर आईं, इरादे गुदगुदाते हैं

नात ख़्वान: अल्लामा हाफ़िज़ बिलाल क़ादरीशायर: मौलाना जमीलुर्रहमान रज़वी क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

उमंगें जोश पर आईं, इरादे गुदगुदाते हैंजमील-ए-क़ादरी ! शायद हबीब-ए-हक़ बुलाते हैं

जगा देते हैं क़िस्मत चाहते हैं जिस की दम भर मेंवो जिस को चाहते हैं अपने रौज़े पर बुलाते हैं

उन्हें मिल जाता है गोया वो साया 'अर्श-ए-आ'ज़म कातेरी दीवार के साए में जो बिस्तर जमाते हैं

मुक़द्दर इस को कहते हैं, फ़रिश्ते 'अर्श से आ करग़ुबार-ए-फ़र्श-ए-तयबा अपनी आँखों में लगाते हैं

ख़ुदा जाने कि तयबा को हमारा कब सफर होगामदीने को हज़ारों क़ाफ़िले हर साल जाते हैं

शह-ए-तयबा ! ये क़ुव्वत है तेरे दर के गदाओं मेंजिला देते हैं मुर्दों को वो जिस दम लब हिलाते हैं

मेरे मौला ! ये क़ुव्वत है तेरे दर के गदाओं मेंवो जिस को चाहते हैं शाह दम भर में बनाते हैं

मदीने की तलब में जो नहीं लेते हैं जन्नत कोउन्हें तशरीफ़ ला कर हज़रत-ए-रिज़वाँ मनाते हैं

तसद्दुक़ जान-ए-'आलम ! इस करीमी और रहीमी केगुनह करते हैं हम, वो अपनी रहमत से छुपाते हैं

जमील-ए-क़ादरी को देख कर हूरों में ग़ुल होगायही हैं वो कि जो ना'त-ए-हबीब-ए-हक़ सुनाते हैं

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