नात लिरिक्स

Aankhon Ko Band Kar Lo Aao Chalein Madine

आँखों को बंद कर लो आओ चलें मदीने

नात ख़्वान: अल्लामा हाफ़िज़ बिलाल क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तसव्वुर में मदीना, है यादों में मदीनातसव्वुर में मदीना, है यादों में मदीना

हर वक़्त तसव्वुर में मदीने की गली होफिर याद मुहम्मद की मेरे दिल में बसी हो

आँखों को बंद कर लो, आओ चलें मदीनेसाहिल पे अब कहाँ हैं वो मुंतज़िर सफ़ीने

आँखों को बंद कर लो, आओ चलें मदीने

उतरे हुए मलक हैं तयबा की रहगुज़र मेंरिम-झिम गुलाब मंज़र सिमटे हैं चश्म-ए-तर मेंबाद-ए-ख़नक खड़ी है रस्ते के हर शजर मेंरहमत बरस रही है इस दिल-कुशा सफ़र मेंमाथे पे झिलमिलाएँ ख़ुश्बू भरे पसीने

आँखों को बंद कर लो, आओ चलें मदीने

तसव्वुर में मदीना, है यादों में मदीनातसव्वुर में मदीना, है यादों में मदीना

मुश्ताक़ हैं निगाहें, बेताब चश्म-ए-तर हैआँसू हैं चंद बाक़ी, सामान मुख़्तसर हैइक रक़्स करती तितली हर शाख़-ए-नूर पर हैऐ दिल ! सँभल, नबी का रौज़ा क़रीब-तर हैझुक झुक के दें सलामी अश्कों के आबगीने

आँखों को बंद कर लो, आओ चलें मदीने

ख़ुश-बख़्त मेरी आँखो ! ये शहर-ए-मुस्तफ़ा हैसुल्तान-ए-दो-जहाँ का दरबार आ गया हैदेहलीज़-ए-मुस्तफ़ा से लिपटी हुई दु'आ हैहर हर्फ़-ए-इल्तिजा में मेरी भी इल्तिजा हैदिल में छुपे हुए हैं, आक़ा ! कई दफ़ीने

आँखों को बंद कर लो, आओ चलें मदीने

सज्दो ! बड़े अदब से उतरो मेरी जबीं सेझुक कर गले मिलो तुम तयबा की सर-ज़मीं सेजो माँगना नबी से, वो माँगना यक़ीं सेसब कुछ तुम्हें मिलेगा इस शहर-ए-दिल-नशीं सेपाओगे हर क़दम पर ला'ल-ओ-गोहर के ज़ीने

आँखों को बंद कर लो, आओ चलें मदीने

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