नात लिरिक्स

Bayaan Ho Kis Tarah Rutba Mere Taaju-shsharee'aa Ka

बयाँ हो किस तरह रुत्बा मेरे ताजु-श्शरी'आ का

नात ख़्वान: अल्लामा हाफ़िज़ बिलाल क़ादरीशायर: मुहम्मद आसिमुल क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बयाँ हो किस तरह रुत्बा मेरे ताजु-श्शरी'आ काज़माने भर में है चर्चा मेरे ताजु-श्शरी'आ का

फ़क़ाहत नाज़ करती है मेरे ताजु-श्शरी'आ परफ़क़ाहत में है वो मलका मेरे ताजु-श्शरी'आ का

रज़ा के 'इल्म के वारिस मेरे ताजु-श्शरी'आ हैंज़रा देखे कोई रुत्बा मेरे ताजु-श्शरी'आ का

असाग़िर की करूँ क्या बात, ए हज़रत के दीवानो !अकाबिर ने पढ़ा ख़ुत्बा मेरे ताजु-श्शरी'आ का

झुकाया उन के आगे 'इल्म वालों ने सर-ए-तस्लीमथा रो'ब-ओ-दबदबा ऐसा मेरे ताजु-श्शरी'आ का

मेरे अख़्तर के जाने का उठाया ग़म ज़माने नेदिलों पर ऐसा था क़ब्ज़ा मेरे ताजु-श्शरी'आ का

जनाज़ा देख कर इन के मुख़ालिफ़ के लबों पर भीसजा ता'रीफ़ का नग़्मा मेरे ताजु-श्शरी'आ का

इन्हें जो देखता था वो दिवाना हो ही जाता थाथा इतना दिल-नशीं चेहरा मेरे ताजु-श्शरी'आ का

मुख़ालिफ़ जलते हैं, जलते रहें, परवाह क्या हम कोलगेगा हश्र तक ना'रा मेरे ताजु-श्शरी'आ का

हुआ है उन को देखे एक 'अर्सा, ए जहाँ वालो !नज़र में अब भी है जल्वा मेरे ताजु-श्शरी'आ का

'अजम क्या है, 'अरब वालों ने इन की दस्त-बोसी कीहसीं था इस क़दर लहजा मेरे ताजु-श्शरी'आ का

जनाब-ए-मुफ़्ती-ए-आ'ज़म की नज़र-ए-ख़ास थी इन परतभी तो नाम है चमका मेरे ताजु-श्शरी'आ का

वली, बाबा वली, दादा वली, नाना वली इन केदिलों में बस गया सजरा मेरे ताजु-श्शरी'आ का

अदब वो सय्यिदों का दिल की गहराई से करते थेमुझे अच्छा लगा उस्वा मेरे ताजु-श्शरी'आ का

उठाया फ़ाइदा दुनिया ने उन की ज़ात-ए-अक़्दस काजहाँ में फ़ैज़ है बरसा मेरे ताजु-श्शरी'आ का

पहुँच कर उन के दर पर दिल नहीं करता है जाने कोहसीं है इस क़दर रौज़ा मेरे ताजु-श्शरी'आ का

रसूल-ए-पाक के सदक़े दु'आ मक़बूल हो, मौला !सदा फूले-फले बेटा मेरे ताजु-श्शरी'आ का

शरी'अत और तरीक़त के, ए 'आसिम ! फूल थे हज़रतचमन भी ख़ूब-तर महका मेरे ताजु-श्शरी'आ का

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