नात लिरिक्स

Tumhe Jo Dil Se Pukara Mere Ghareeb Nawaz

तुम्हें जो दिल से पुकारा मेरे ग़रीब नवाज़

नात ख़्वान: साबिर रज़ा अज़हरी सुरतशायर: साबिर रज़ा अज़हरी सुरतउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तुम्हें जो दिल से पुकारा, मेरे ग़रीब-नवाज़ !ब-वक़्त पाया सहारा, मेरे ग़रीब-नवाज़ !

'अली के नूर-ए-नज़र, फ़ातिमा के लख़्त-ए-जिगरनबी की आँख का तारा, मेरे ग़रीब-नवाज़ !

समाया सारा अना सागर एक कूज़े मेंसुना जो हुक्म तुम्हारा, मेरे ग़रीब-नवाज़ !

तुम्हीं से हिन्द में ईमाँ की रौशनी फैलीतुम्हीं ने दीन सँवारा, मेरे ग़रीब-नवाज़ !

जहाँ दु'आएँ हमेशा क़ुबूल होती हैंवो आस्ताँ है तुम्हारा, मेरे ग़रीब-नवाज़ !

जो डूबा दरिया-ए-रहमत में आप की, ख़्वाजा !मिला न उस को किनारा, मेरे ग़रीब-नवाज़ !

बना लो अपना गदा कहता है यही साबिरख़ुदा-रा कर दो इशारा, मेरे ग़रीब-नवाज़ !

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।