नात लिरिक्स

Tu Sham-e-Risalat Hai Aalam Tera Parwana

तू शम-ए-रिसालत है आलम तेरा परवाना

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुस्तफ़ा रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तू शम'-ए-रिसालत है, 'आलम तेरा परवानातू माह-ए-नुबुव्वत है, ऐ जल्वा-ए-जानाना !

जो साक़ी-ए-कौसर के चेहरे से नक़ाब उठेहर दिल बने मय-ख़ाना, हर आँख हो पैमाना

दिल अपना चमक उठे ईमान की तल'अत सेकर आँखें भी नूरानी, ऐ जल्वा-ए-जानाना !

सरशार मुझे कर दे इक जाम-ए-लबालब सेता-हश्र रहे, साक़ी ! आबाद ये मय-ख़ाना

तुम आए छटी बाज़ी, रौनक़ हुई फिर ताज़ीका'बा हुवा फिर का'बा, कर डाला था बुत-ख़ाना

उस दर की हुज़ूरी ही 'इस्याँ की दवा ठहरीहै ज़हर-ए-म'आसी का तयबा ही शिफ़ा-ख़ाना

हर फूल में बू तेरी, हर शम'अ में ज़ौ तेरीबुलबुल है तेरा बुलबुल, परवाना है परवाना

पीते हैं तेरे दर का, खाते हैं तेरे दर कापानी है तेरा पानी, दाना है तेरा दाना

संग-ए-दर-जानाँ पर करता हूँ जबीं-साईसज्दा न समझ, नज्दी ! सर देता हूँ नज़राना

गिर पड़ के यहाँ पहुँचा, मर मर के इसे पायाछूटे न, इलाही ! अब संग-ए-दर-ए-जानाना

वो कहते न कहते कुछ, वो करते न करते कुछऐ काश ! वो सुन लेते, मुझ से मेरा अफ़साना

आँखों में मेरे तू आ और दिल में मेरे बस जादिल-शाद मुझे फ़रमा, ऐ जल्वा-ए-जानाना !

आबाद इसे फ़रमा, वीराँ है दिल-ए-नूरीजल्वे तेरे बस जाएँ, आबाद हो वीराना

सरकार के जल्वों से रौशन है दिल-ए-नूरीता-हश्र रहे रौशन नूरी का ये काशाना

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