नात लिरिक्स

Teri Nazron Se Nazron Ka Milana Bhi Hai Be-adabi

तेरी नज़रों से नज़रों का मिलाना भी है बेअदबी

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीशायर: क़मर अंजुमउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तेरी नज़रों से नज़रों का मिलाना भी है बे-अदबीतेरी सरकार में पलकें उठाना भी है बे-अदबी

वो नादाँ हैं जो ऊँचा बोलते हैं तेरी नगरी मेंवहाँ तो बे-तकल्लुफ़ मुस्कुराना भी है बे-अदबी

वहाँ की धूप में ठंडक है जन्नत के मकानों कीवहाँ की धूप से ख़ुद को बचाना भी है बे-अदबी

फ़रिश्ते जिन की मिट्टी पर क़दम रखते झिझकते हैंमेरे जैसों का उन गलियों में जाना भी है बे-अदबी

किनारे पर खड़े रहना 'अलामत कम-निगाही कीतेरी मौजों में लेकिन डूब जाना भी है बे-अदबी

वहाँ जाने की ख़्वाहिश का न होना भी है गुस्ताख़ीवहाँ पर जा के, अंजुम ! लौट आना भी है बे-अदबी

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