नात लिरिक्स

Teri Chokhat Pe Mangta Tera Aa Gaya | Meri Bigdi Bana De Shah-e-do-sara

तेरी चौखट पे मँगता तेरा आ गया | मेरी बिगड़ी बना दे शह-ए-दो-सरा

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तेरी चौखट पे मँगता तेरा आ गयामेरी बिगड़ी बना दे, शह-ए-दो-सरा !मैं सरापा ख़ता, तू सरापा 'अतामेरी बिगड़ी बना दे, शह-ए-दो-सरा !

मुझ कमीने पे तू ने ये एहसाँ कियामाह-ए-रमज़ान में अपना मेहमाँ कियाये तेरा ही करम है तेरी ही 'अतामेरी बिगड़ी बना दे, शह-ए-दो-सरा !

मैं तो क़ाबिल न था, ऐ शह-ए-दो-जहाँ !मुझ सा 'आसी कहाँ और तेरा दर कहाँये तेरा ही करम है तेरी ही 'अतामेरी बिगड़ी बना दे, शह-ए-दो-सरा !

तेरे रौज़े का दीदार जिस ने कियातुझ से मुज़्दा शफ़ा'अत का उस ने लियामैं भी तो हो गया आज हाज़िर, शहा !मेरी बिगड़ी बना दे, शह-ए-दो-सरा !

दूर रंज-ओ-अलम सारे कर दे, शहा !मेरे दामन को भी आज भर दे, शहा !दर पे आया तेरे भीक लेने गदामेरी बिगड़ी बना दे, शह-ए-दो-सरा !

तेरे ही सर सजा है शफ़ा'अत का ताजलाज वाले ! तेरे हाथ है मेरी लाजबख़्शवाना मुझे भी ब-रोज़-ए-जज़ामेरी बिगड़ी बना दे, शह-ए-दो-सरा !

कब पियूँगा मैं शरबत तेरी दीद काअब तो रख ले भरम मेरी उम्मीद काइक झलक ही ख़ुदा-रा दिखा दे, शहा !मेरी बिगड़ी बना दे, शह-ए-दो-सरा !

बे-सहारा हूँ मैं, ग़म का मारा हूँ मैंलाख पापी सही पर तुम्हारा हूँ मैंबहर-ए-ग़ौस-उल-वरा अपने सीने लगामेरी बिगड़ी बना दे, शह-ए-दो-सरा !

जान दुनिया के ग़म में सुलगती रहीआँख मेरी इसी ग़म में रोती रहीमुझ को बहर-ए-रज़ा अपने ग़म में रुलामेरी बिगड़ी बना दे, शह-ए-दो-सरा !

ऐ कस-ए-बे-कसाँ ! दर तेरा छोड़ करझिड़कियाँ ग़ैर की खाने जाऊँ किधरतेरे टुकड़ों पे पलता रहूँ मैं सदामेरी बिगड़ी बना दे, शह-ए-दो-सरा !

जब मदीने से रुख़्सत मैं होने लगूँहिचकियाँ बाँध कर, काश ! रोने लगूँमुझ को सोज़-ए-जिगर ऐसा कर दे 'अतामेरी बिगड़ी बना दे, शह-ए-दो-सरा !

है मुक़द्दर में गर लौटना अपने घरकाश ! हो जाए ऐसा कि क़ल्ब-ओ-जिगरछोड़ जाए इधर ये 'उबैद-ए-रज़ामेरी बिगड़ी बना दे, शह-ए-दो-सरा !

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