नात लिरिक्स

Teri Chaukhat Pe Jo Sar Apna Jhuka Jaate Hain

तेरी चौखट पे जो सर अपना झुका जाते हैं

नात ख़्वान: साबिर रज़ा अज़हरी सुरतशायर: मुफ़्ती अख़्तर रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तेरी चौखट पे जो सर अपना झुका जाते हैंहर बुलंदी को वही नीचा दिखा जाते हैं

सरफ़राज़ी-ए-अजल उन को मिला करती हैनख़वत-ए-सर जो तेरे दर पे मिटा जाते हैं

डूबे रहते हैं तेरी याद में जो शाम-ओ-सहरडूबतों को वही साहिल से लगा जाते हैं

ऐ मसीहा ! तेरे बीमार हैं ऐसे बीमारकि जहाँ भर का वो दुख-दर्द मिटा जाते हैं

मरने वाले रुख़-ए-ज़ेबा पे तेरे, जान-ए-जहाँ !'ऐश-ए-जावेद के असरार बता जाते हैं

आसमाँ ! तुझ से उठाए न उठेंगे सुन लेहिज्र के सदमे जो 'उश्शाक़ उठा जाते हैं

ज़िक्र-ए-सरकार भी क्या आग है जिस से सुन्नीबैठे बैठे दिल-ए-नज्दी को जला जाते हैं

जिन को शीरीनी-ए-मीलाद से घिन आती हैआँख के अंधे उन्हें कव्वा खिला जाते हैं

दश्त-ए-तयबा में नहीं कील का खटका, अख़्तर !नाज़ुक-अंदाम वहाँ बरहना पा जाते हैं

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