नात लिरिक्स

Apne Dar Pe Jo Bulao To Bahut Achchha Ho

अपने दर पे जो बुलाओ तो बहुत अच्छा हो

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुफ़्ती अख़्तर रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अपने दर पे जो बुलाओ तो बहुत अच्छा होमेरी बिगड़ी जो बनाओ तो बहुत अच्छा हो

क़ैद-ए-शैताँ से छुड़ाओ तो बहुत अच्छा होमुझ को अपना जो बनाओ तो बहुत अच्छा हो

गर्दिश-ए-दौर ने पामाल किया मुझ को, हुज़ूर !अपने क़दमों में सुलाओ तो बहुत अच्छा हो

यूँ तो कहलाता हूँ बंदा मैं तुम्हारा लेकिनअपना कह के जो बुलाओ तो बहुत अच्छा हो

ग़म-ए-पैहम से ये बस्ती मेरी वीरान हुईदिल में अब ख़ुद को बसाओ तो बहुत अच्छा हो

कैफ़ इस बादा-ए-गुलनार से मिलता ही नहींअपनी आँखों से पिलाओ तो बहुत अच्छा हो

तुम तो मुर्दों को जिला देते हो, मेरे आक़ा !मेरे दिल को भी जिलाओ तो बहुत अच्छा हो

जिस ने शर्मिंदा किया मेहर-ओ-मह-ओ-अंजुम कोइक झलक फिर वो दिखाओ तो बहुत अच्छा हो

रो चुका यूँ तो मैं औरों के लिए ख़ूब मगरअपनी उल्फ़त में रुलाओ तो बहुत अच्छा हो

यूँ न अख़्तर को फिराओ, मेरे मौला ! दर दरअपनी चौखट पे बिठाओ तो बहुत अच्छा हो

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