नात लिरिक्स

Tamanna Muddaton Ki Ab Mita De | Ilahi Mujh Ko Bhi Haji Bana De

तमन्ना मुद्दतों की अब मिटा दे | इलाही मुझ को भी हाजी बना दे

नात ख़्वान: सय्यिद मुइज़ अशरफ़ीशायर: शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तमन्ना मुद्दतों की अब मिटा देइलाही ! मुझ को भी हाजी बना देदिखा दे वो दर-ए-का'बा दिखा देइलाही ! मुझ को भी हाजी बना दे

कभी का'बे की चादर को मैं चूमूँकभी मैं मुल्तज़िम से जा के लिपटूँ'अताओं पर तेरी रो कर मैं झूमूँनसीबा तू मेरा भी जगमगा दे

इलाही ! मुझ को भी हाजी बना दे

का'बा मैं जाऊँ, जा कर न आऊँका'बे में जा कर मैं मर जाऊँ

रवाँ का'बे की जानिब क़ाफ़िले हैंकरम के फिर से जारी सिलसिले हैंमेरी आँखों में जो आँसू भरे हैंउन्हें रुक्न-ए-यमानी का पता दे

इलाही ! मुझ को भी हाजी बना दे

मौला ! दिखा दे, मौला ! दिखा देतयबा वो तयबा, का'बा वो का'बाक्या ख़ुश-नुमा है, क्या दिल-नशीं हैतयबा वो तयबा, का'बा वो का'बामेरी तमन्ना, मेरी तलब हैतयबा वो तयबा, का'बा वो का'बा

ये है शौक़-ए-फ़रीदी की तमन्नाहो शामिल हाजियों में नाम मेरामेरा मस्कन बने शहर-ए-मदीनावहीं मदफ़न भी तू मेरा बना दे

इलाही ! मुझ को भी हाजी बना दे

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