नात लिरिक्स

Hussain Sab Se Azeemtar Hai

हुसैन सब से अज़ीम-तर है

नात ख़्वान: साहिल रज़ा क़ादरीशायर: शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

है मेरा मौला या हुसैनहै तेरा मौला या हुसैनआक़ा का प्यारा या हुसैनहै सब का मौला या हुसैन

हुसैन का ज़िक्र 'अर्श पर हैहुसैन सब से 'अज़ीम-तर हैये हुक्म-ए-सुल्तान-ए-बहर-ओ-बर हैहुसैन सब से 'अज़ीम-तर है

जनाब-ए-मौला हसन बिरादरजनाब-ए-ज़हरा है जिस की मादरजनाब-ए-मौला 'अली पिदर हैहुसैन सब से 'अज़ीम-तर है

जलाल देखा हुसैन का जबपुकार उट्ठा यज़ीदी लश्करजनाब-ए-हैदर का ये पिसर हैहुसैन सब से 'अज़ीम-तर है

ज़ुबाँ पे क़ुरआँ की है तिलावतये देख कर है जहाँ में हैरतकि नोक-ए-नेज़ा पे रक्खा सर हैहुसैन सब से 'अज़ीम-तर है

जो बाग़ी दीन-ए-रसूल का हैजो बाग़ी इब्न-ए-बतूल का हैवो आज भी फिरता दर-ब-दर हैहुसैन सब से 'अज़ीम-तर है

फ़क़त ख़ुदा की रज़ा की ख़ातिरनबी के दीं की बक़ा की ख़ातिरलुटा दिया जिस ने अपना घर हैहुसैन सब से 'अज़ीम-तर है

चला जो मैदाँ में ले के ख़ंजरतो थरथराया यज़ीदी लश्करवो शेर-ए-हैदर है, वो निडर हैहुसैन सब से 'अज़ीम-तर है

हुआ है हैराँ जहान साराजो एक कासे में सागर आयाकरम ये उस का ही ख़्वाजा पर हैहुसैन सब से 'अज़ीम-तर है

जहाँ से, शौक़-ए-फ़रीदी ! वल्लाहयज़ीद की नस्ल मिट चुकी हैहमारा मौला मगर अमर हैहुसैन सब से 'अज़ीम-तर है

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