नात लिरिक्स

Sunte Hain Ke Mehshar Mein Sirf Un Ki Rasai Hai

सुनते हैं कि महशर में सिर्फ़ उन की रसाई है

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सुनते हैं कि महशर में सिर्फ़ उन की रसाई हैगर उन की रसाई है लो जब तो बन आई है

मचला है कि रहमत ने उम्मीद बँधाई हैक्या बात तेरी, मुजरिम ! क्या बात बनाई है

सब ने सफ़-ए-महशर में ललकार दिया हम कोऐ बेकसों के आक़ा ! अब तेरी दुहाई है

यूँ तो सब उन्हीं का है, पर दिल की अगर पूछोये टूटे हुए दिल ही ख़ास उन की कमाई है

ज़ाइर गए भी कब के, दिन ढलने पे है, प्यारे !उठ मेरे अकेले चल, क्या देर लगाई है

बाज़ार-ए-'अमल में तो सौदा न बना अपनासरकार करम तुझ में 'ऐबी की समाई है

गिरते हुओं को मुज़्दा सज्दे में गिरे मौलारो रो के शफ़ा'अत की तम्हीद उठाई है

ऐ दिल ! ये सुलगना क्या, जलना है तो जल भी उठदम घुटने लगा, ज़ालिम ! क्या धूनी रमाई है

मुजरिम को न शर्माओ, अहबाब ! कफ़न ढक दोमुँह देख के क्या होगा, पर्दे में भलाई है

अब आप ही सँभालें तो काम अपने सँभल जाएँहम ने तो कमाई सब खेलों में गँवाई है

ऐ 'इश्क़ ! तेरे सदक़े जलने से छुटे सस्तेजो आग बुझा देगी, वो आग लगाई है

हिर्स-ओ-हवस-ए-बद से, दिल ! तू भी सितम कर लेतू ही नहीं बेगाना, दुनिया ही पराई है

हम दिल-जले हैं किस के, हट फ़ितनों के परकालेक्यूँ फूँक दूँ इक उफ़ से क्या आग लगाई है

तयबा न सही अफ़ज़ल, मक्का ही बड़ा, ज़ाहिद !हम 'इश्क़ के बंदे हैं, क्यूँ बात बढ़ाई है

मतला' में ये शक क्या था, वल्लाह रज़ा ! वल्लाहसिर्फ़ उन की रसाई है, सिर्फ़ उन की रसाई है

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