नात लिरिक्स

Sukoon Paya Hai Beksai Ne | Hudood-e-Gham Se Nikal Gaya Hoon

सुकून पाया है बेकसी ने | हुदूद-ए-ग़म से निकल गया हूँ

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: क़मर जलालवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सुकून पाया है बेकसी ने, हुदूद-ए-ग़म से निकल गया हूँख़याल-ए-हज़रत जब आ गया है तो गिरते गिरते सँभल गया हूँ

कभी मैं सुब्ह-ए-अज़ल गया हूँ, कभी मैं शाम-ए-अबद गया हूँतलाश-ए-जानाँ में कितनी मंज़िल ख़ुदा ही जाने निकल गया हूँ

हरम की तपती हुई ज़मीं पर जिगर बिछाने की आरज़ू मेंबहार-ए-ख़ुल्द-ए-बरीं मिली तो बचा के दामन निकल गया हूँ

मेरे जनाज़े पे रोने वालो ! फ़रेब में हो, ब-ग़ौर देखोमरा नहीं हूँ, ग़म-ए-नबी में लिबास-ए-हस्ती बदल गया हूँ

ये शान मेरी, ये मेरी क़िस्मत, ख़ुशा-मोहब्बत ज़हे-'अक़ीदतज़बाँ पे आते ही नाम-ए-नामी, अदब के साँचे में ढल गया हूँ

ब-फ़ैज़-ए-हस्सान इब्न-ए-साबित, ब-रंग-ए-ना'त-ए-रसूल-ए-रहमतक़मर ! मैं शेर-ओ-सुख़न की लय में अदब के मोती उगल गया हूँ

ब-फैज़-ए-हस्सान इब्न-ए-साबित, ब-रंग-ए-ना'त-ए-नबी-ए-अकरमक़मर ! मैं शेर-ओ-सुख़न की लय में अदब के मोती उगल गया हूँ

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