सूरज से न चँदा से, न शम्'अ जलाने से'आलम ये हुआ रौशन, सरकार के आने से
घर-बार महकता है, तक़दीर चमकती हैसरकार-ए-दो-'आलम की मीलाद मनाने से
कोई भी नहीं ऐसा जो रोक सके हम कोहम जश्न मनाएँगे, कह दो ये ज़माने से
मीलाद मनाएँगे, तक़दीर जगाएँगेजो जलते हैं, जल जाएँ, घर-बार सजाने से
इस्लाम की ख़ातिर तुम, घर-बार लुटा देनाये दर्स मिला हम को, आक़ा के घराने से
मशहूर हुआ अज़मत, मक़बूल हुआ अज़मतदर-अस्ल शह-ए-वाला की ना'त सुनाने से
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