नात लिरिक्स

Duroodon Ki Dali Salamon Ke Tohfe Farishte Labon Par Sajae Hue Hain

दुरूदों की डाली सलामों के तोहफ़े फ़रिश्ते लबों पर सजाए हुए हैं

नात ख़्वान: अज़मत रज़ा भागलपुरीशायर: अज़मत रज़ा भागलपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दुरूदों की डाली, सलामों के तोहफ़े, फ़रिश्ते लबों पर सजाए हुए हैंहलीमा के घर मुस्तफ़ा आ रहे हैं, दो 'आलम ख़ुशी में नहाए हुए हैं

गुनहगार होगा, ख़ता-कार होगा, मगर जो नबी का वफ़ादार होगाजलाएगी कैसे भला उस को दोज़ख़, वो दामन में जिन को छुपाए हुए हैं

डराने की बातें, सताने की बातें, न कर मुस्लिमों को भगाने की बातेंउन्हें क्या भगाएगा भारत से कोई, जो ख़्वाजा पिया के बसाए हुए हैं

नबी की मोहब्बत से सरशार हैं हम, बरेली के सच्चे वफ़ादार हैं हममिलाते नहीं हाथ हम नज्दियों से, हमें आ'ला हज़रत सिखाए हुए हैं

ख़ुदा के वली की करामत तो देखो, मुजाहिद की शान-ए-विलायत तो देखोये मुमकिन नहीं रेल बढ़ जाए आगे, मुजाहिद मुसल्ला बिछाए हुए हैं

ख़ुदा उन को हर वक़्त रक्खे सलामत, दु'आओं से जिन की बरसती है रहमतये रब का करम, बाप-माँ की दु'आ है, यहाँ हम जो 'इज़्ज़त कमाए हुए हैं

बढ़ाई है अल्लाह ने इतनी 'इज़्ज़त, बढ़ी जा रही है ज़माने में शोहरतये बरकत है ना'त-ए-नबी की, ऐ 'अज़मत ! जहाँ देखो हर सम्त छाए हुए हैं

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