नात लिरिक्स

Jante Hain Mustafa Kya Chahiye | Hum Ghulamon Ko Madina Chahiye

जानते हैं मुस्तफ़ा क्या चाहिए | हम ग़ुलामों को मदीना चाहिए

नात ख़्वान: अज़मत रज़ा भागलपुरीशायर: अज़मत रज़ा भागलपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जानते हैं मुस्तफ़ा क्या चाहिएहम ग़ुलामों को मदीना चाहिए

मैं भी देखूँगा मदीना, या नबी !आप का बस इक इशारा चाहिए

सारे फूलों ने यही मिल कर कहामुझ को आक़ा का पसीना चाहिए

बाप-माँ अब तक सलामत हैं मेरेइस से बढ़ कर क्या ख़ज़ाना चाहिए

रेत पर मुझ को है जन्नत देखनामुझ को भी बहलोल-ए-दाना चाहिए

ये अना-सागर ने बरजस्ता कहामुझ को ख़्वाजा का कटोरा चाहिए

अहल-ए-सुन्नत का यही ए'लान हैफिर हमें ताजुश्शरी'आ चाहिए

कह उठेगी बाग़-ए-जन्नत हश्र मेंमुझ को आक़ा का दीवाना चाहिए

ना'त पढ़ने के लिए, 'अज़मत रज़ा !बुलबुल-ए-तयबा का लहज़ा चाहिए

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