नात लिरिक्स

Bulwa Lo Taiba Mein Aaqa Mujh Ko Bhi Ik Baar

बुलवा लो तयबा में आक़ा मुझ को भी इक बार

नात ख़्वान: अज़मत रज़ा भागलपुरीशायर: अज़मत रज़ा भागलपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बुलवा लो तयबा में, आक़ा ! मुझ को भी इक बारकैसा है वो शहर-ए-मदीना दिखला दो, सरकार !

इस ने सुनाया, उस ने बताया, शहर-ए-मदीना ऐसा हैमैं भी जा कर देखूँ, आक़ा ! गुंबद-ए-ख़ज़रा कैसा हैजिस ने देखा उस ने बताया, ख़ुल्द-ए-बरीं के जैसा हैजिस दर पे हूर-ओ-ग़िल्माँ का लगता है बाज़ार

कैसा है वो शहर-ए-मदीना दिखला दो, सरकार !

अक्सर ऐसा होता है, रातों में नींद न आती हैयाद मदीना जब आता है, आँख मेरी भर आती हैख़ूब मचलने लगता है दिल, बेचैनी बढ़ जाती हैइन आँखों की प्यास बुझा दो, नबियों के सरदार !

कैसा है वो शहर-ए-मदीना दिखला दो, सरकार !

मुश्किल में हूँ, आक़ा ! यहाँ पर, नज़र-ए-'इनायत हो जाएलौट के आएँ ख़ुशियों के दिन, दूर मुसीबत हो जाएमौत से पहले रौज़ा-ए-अनवर की भी ज़ियारत हो जाएहिन्द में जीना हो गया है, आक़ा ! अब दुश्वार

कैसा है वो शहर-ए-मदीना दिखला दो, सरकार !

शहर-ए-नबी में हर-दिन, हर-सू नूर बरसता रहता हैमैं ने सुना है उन की गली में लुत्फ़-ओ-करम का धारा हैवज्द में आ कर उन का सना-ख़्वाँ 'अज़मत आख़िर कहता हैख़ुल्द-ए-बरीं के बाग़ से बेहतर तयबा के गुलज़ार

कैसा है वो शहर-ए-मदीना दिखला दो, सरकार !

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