नात लिरिक्स

Kis Ko Maloom Hai Kis Ko Hai Ye Pata

किस को मालूम है किस को है ये पता

नात ख़्वान: अज़मत रज़ा भागलपुरीशायर: अज़मत रज़ा भागलपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

किस को मा'लूम है, किस को है ये पतारब त'आला को महशर में क्या चाहिएहर किसी को ख़ुदा की रज़ा चाहिएऔर ख़ुदा को नबी की रज़ा चाहिए

कैसे ईमाँ बचाएँ ये रहता है ग़मसब को अपनी पड़ी है, कहाँ जाएँ हमऐसे हालात में और इस दौर मेंफिर बरेली का अहमद रज़ा चाहिए

थे बहत्तर मगर दबदबा याद करहै हुसैनी तो फिर कर्बला याद करज़ुल्म का सर यहाँ काटने के लिएदिल में शब्बीर का हौसला चाहिए

गिरते गिरते यक़ीनन सँभल जाएगामेरा दा'वा है ग़म से निकल जाएगाकामयाबी क़दम चूम लेगी तेरेशर्त है बाप-माँ की दु'आ चाहिए

वो मुजाहिद मेरा अरशद-उल-क़ादरीकाश ! आ जाते अख़्तर रज़ा अज़हरीहर तरफ़ से ये आने लगी फिर सदासुन्नियत को वही क़ाफ़िला चाहिए

छोड़ कर मुस्तफ़ा को कहाँ जाएगादेखना रोज़-ए-महशर में पछताएगादामन-ए-मुस्तफ़ा आज ही थाम लेख़ुल्द में गर तुझे दाख़िला चाहिए

रब ने क़ुरआन में कर दिया फ़ैसला'इश्क़ होगा नबी से तो होगा भलाजितने गुस्ताख़ हैं, जाएँगे नार मेंख़ुल्द को 'आशिक़-ए-मुस्तफ़ा चाहिए

मेरे सरकार का जो सना-ख़्वान हैशा'इरों में अलग जिस की पहचान हैझूम कर ना'त पढ़ता है हर बज़्म मेंइस लिए मुझ को 'अज़मत रज़ा चाहिए

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