नात लिरिक्स

Sooraj Ka Chamakna To Bas Ek Bahana Hai

सूरज का चमकना तो बस एक बहाना है

नात ख़्वान: सज्जाद निज़ामीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सूरज का चमकना तो बस एक बहाना हैसरकार के जल्वों से रौशन ये ज़माना है

ख़ुद खाना नहीं खाया, औरों को खिलाया हैहम जैसे ग़रीबों को सीने से लगाया हैऐ प्यारे 'अली ! तेरा इक ऐसा घराना है

पढ़ पढ़ के दुरूदों को तक़दीर जगाना हैऔर आज हमें अपनी झोली को भर आना हैसरकार की महफ़िल है, सरकार को आना है

ग़ौस-ए-समदानी की 'अज़मत कोई क्या जानेरब जाने, नबी जाने या मौला 'अली जानेबग़दाद में रह कर भी नज़रों में ज़माना है

वो शान में 'आली हैं, वो हिन्द के वाली हैंमायूस नहीं होते जो उन के सवाली हैंदरबार में ख़्वाजा के रहमत का ख़ज़ाना है

जो दिल में लिए मेरे आक़ा की मोहब्बत हैंया'नी आ'ला हज़रत दुनिया की ज़रूरत हैंइस्लाम से बातिल के दिल को दहलाना है

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